Thursday, May 14

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Road Tax से राहत: अब फैक्ट्री और खदानों में इस्तेमाल होने वाले वाहन करमुक्त

 

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नई दिल्ली: कोल इंडिया, SAIL, टाटा स्टील, एलएंडटी, एसीसी और अल्ट्राटेक जैसी बड़ी कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि फैक्ट्रियों, खदानों और कंस्ट्रक्शन साइटों में इस्तेमाल होने वाले भारी वाहन जैसे डंपर, एक्सकेवेटर और सरफेस माइनर को मोटर वाहन नहीं माना जाएगा। इसलिए इन वाहनों पर रोड टैक्स नहीं लगेगा।

 

फैसले की मुख्य बातें:

 

जस्टिस पंकज मित्तल की अगुवाई वाली बेंच ने साल 2011 में गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए यह निर्णय दिया।

कोर्ट ने कहा कि ये वाहन खास तौर पर इंडस्ट्रियल एरिया के अंदर चलाने के लिए बनाए गए हैं और सार्वजनिक सड़कों पर नहीं चलते।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर ये वाहन पब्लिक रोड पर पाए गए, तो उन पर टैक्स वसूलने के साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।

 

पीछे का कारण:

साल 2011 में गुजरात हाई कोर्ट ने कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट पर रोड टैक्स लगाने की अनुमति दी थी। राज्य सरकार की ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने फैक्ट्री और साइट पर इस्तेमाल होने वाले भारी वाहनों से टैक्स की मांग की थी। इसके खिलाफ अल्ट्राटेक और अन्य कंपनियों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की, जो अब सुप्रीम कोर्ट में सही ठहराई गई।

 

क्या है प्रभाव:

इस फैसले से बड़ी इंडस्ट्रियल और माइनिंग कंपनियों को काफी राहत मिली है। अब उनके कई हैवी व्हीकल, जो अपने जीवनकाल में कभी भी पब्लिक रोड पर नहीं चलते, उन्हें रोड टैक्स से मुक्त रखा जाएगा। यह व्यवस्था संविधान की सातवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुरूप है, जो केवल सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले वाहनों पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्यों को देती है।

 

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