

सियोल। स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। आने वाले समय में मोबाइल फोन को बार-बार चार्ज करने की जरूरत शायद खत्म हो जाए। दक्षिण कोरियाई दिग्गज कंपनी सैमसंग अपने स्मार्टफोन्स के लिए 20,000mAh क्षमता वाली बैटरी की टेस्टिंग कर रही है। यह क्षमता मौजूदा स्मार्टफोन्स की बैटरी से लगभग चार गुना अधिक बताई जा रही है।

अब तक 6,000 से 7,000mAh बैटरी देने वाली चीनी कंपनियों को इस मामले में आगे माना जा रहा था, लेकिन सैमसंग ने एक नई डुअल-स्टैक बैटरी टेक्नोलॉजी के जरिए सभी को चौंका दिया है।
क्या है सैमसंग की नई बैटरी टेक्नोलॉजी?
AndroidHeadlines की रिपोर्ट के मुताबिक, सैमसंग की बैटरी निर्माण इकाई Samsung SDI एक डुअल-स्टैक सिस्टम पर काम कर रही है। इसमें दो अलग-अलग बैटरी सेल्स को एक-दूसरे के ऊपर जोड़कर इस्तेमाल किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इनमें से एक बैटरी 12,000mAh और दूसरी 8,000mAh की है। दोनों को मिलाकर कुल क्षमता 20,000mAh हो जाती है।
हालांकि, इस बैटरी से फोन थोड़ा मोटा जरूर हो सकता है, लेकिन बदले में यूजर्स को बेहद लंबा बैटरी बैकअप मिलेगा। माना जा रहा है कि भविष्य में यह तकनीक अन्य स्मार्टफोन ब्रांड्स भी अपना सकते हैं।
27 घंटे तक स्क्रीन ऑन रहने का दावा
रिपोर्ट्स के अनुसार, सैमसंग की इस बैटरी ने टेस्टिंग के दौरान एक बार चार्ज करने पर 27 घंटे का स्क्रीन-ऑन टाइम दिया है।
स्क्रीन-ऑन टाइम का मतलब है कि फोन चार्ज होने के बाद कितनी देर तक स्क्रीन लगातार ऑन रह सकती है। फिलहाल, अच्छे स्मार्टफोन्स में यह समय करीब 10 से 12 घंटे तक सीमित रहता है। ऐसे में 27 घंटे का आंकड़ा स्मार्टफोन यूज के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।
सैमसंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि, इस तकनीक को बाजार तक पहुंचाने से पहले सैमसंग के सामने एक बड़ी समस्या भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने इस डुअल-स्टैक बैटरी को एक साल से ज्यादा समय तक टेस्ट किया, जिसमें करीब 960 चार्जिंग साइकिल शामिल रहीं।
इस दौरान 8,000mAh वाली बैटरी में सूजन देखी गई। इसकी मोटाई 4mm से बढ़कर 7.2mm हो गई, जो कि सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक मानी जाती है।
बाजार में आने में लगेगा समय
फिलहाल यह तकनीक टेस्टिंग चरण में है और सैमसंग के लिए बैटरी का फूलना (स्वेलिंग) सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगर कंपनी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाती, तो यह तकनीक आम यूजर्स तक पहुंचना मुश्किल हो सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सैमसंग इसमें सफल रहा, तो अगले एक से दो साल में स्मार्टफोन की बैटरी और चार्जिंग की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


