Thursday, May 14

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पाकिस्तान का ‘रेयर अर्थ कार्ड’: चीन की बादशाहत को चुनौती या नई रणनीतिक चाल?

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन/बीजिंग – वैश्विक राजनीति के मंच पर पाकिस्तान ने ऐसा दांव चला है, जिसने अमेरिका, चीन और पूरे एशिया की हलचल बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और आर्मी चीफ़ असीम मुनीर ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान उन्हें एक बॉक्स में रंग-बिरंगे खनिज पत्थर और अयस्क दिखाए। इनमें बास्टनज़ाइट और मोनाज़ाइट जैसे रेयर अर्थ खनिज शामिल बताए जाते हैं, जिनसे सेरीयम, लैंथेनम और नियोडिमियम जैसे तत्व निकाले जाते हैं। यही वे खनिज हैं, जिन पर स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम तक की हाई-टेक इंडस्ट्री टिकी हुई है।

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दुनिया के रेयर अर्थ बाजार का 60–65% हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। अमेरिका भी अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा बीजिंग से आयात करता है। लेकिन चीन की “नियंत्रित निर्यात” नीति ने वॉशिंग्टन पर रणनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में पाकिस्तान का यह प्रस्ताव अमेरिका के लिए संभावित गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिकी कंपनी US Strategic Metals (USSM) से करार किया है। पहले चरण (2025–26) में तांबा और अन्य खनिजों का निर्यात होगा, दूसरे चरण (2026–28) में प्रोसेसिंग प्लांट और रिफाइनरी बनेंगे, जबकि तीसरे चरण (2028 के बाद) बड़े पैमाने पर खनन और ड्रिलिंग प्रोजेक्ट शुरू होंगे। शुरुआती निवेश का मूल्य लगभग 500 मिलियन डॉलर बताया जा रहा है।

चीन-पाक रिश्तों पर सवाल

अब असली चुनौती यह है कि इस सौदे का असर पाकिस्तान-चीन संबंधों पर क्या पड़ेगा। चीन ने पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया है और उसे हमेशा “ऑल-वेदर फ्रेंड” कहा जाता रहा है। यदि पाकिस्तान अमेरिकी कंपनी को रेयर अर्थ खनन का अधिकार देता है, तो यह बीजिंग के लिए सीधा रणनीतिक झटका होगा।

चुनौतियाँ बरकरार

हालाँकि पाकिस्तान की राह आसान नहीं है। बलूचिस्तान और खैबर पख़्तूनख़्वा जैसे इलाकों में सुरक्षा हालात नाजुक हैं। वहाँ विदेशी निवेश और खनन संचालन आसान नहीं होगा। साथ ही पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट भी इस महत्वाकांक्षा को बड़ा जोखिम बना रहे हैं।

भारत और एशिया पर असर

यदि अमेरिका को पाकिस्तान से भरोसेमंद रेयर अर्थ सप्लाई मिल जाती है, तो चीन की मोनोपॉली को गहरी चोट पहुंचेगी। भारत के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में नई गर्माहट आ सकती है और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

👉 कुल मिलाकर, पाकिस्तान का यह “रेयर अर्थ कार्ड” उसकी विदेश नीति में नया अध्याय खोल सकता है। यह कदम अमेरिका के लिए अवसर है, चीन के लिए खतरे की घंटी और पाकिस्तान के लिए अस्तित्व की बड़ी परीक्षा। अभी तो बस इतना तय है कि एक छोटे से बॉक्स में रखे गए रंगीन पत्थरों ने वैश्विक राजनीति को झकझोर दिया है।


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