
नई दिल्ली। क्या मोबाइल टावर से कैंसर होता है? क्या बड़े टावर से ज्यादा रेडिएशन निकलता है? ऐसे सवाल अक्सर लोगों के मन में डर पैदा करते हैं। अब भारत सरकार ने अपने तरंग संचार पोर्टल पर इस विषय पर पूरी जानकारी साझा कर स्पष्ट किया है कि मोबाइल टावर से कैंसर का कोई खतरा नहीं है।
मोबाइल टावर और रेडिएशन
सरकार के अनुसार, मोबाइल टावर से निकलने वाला रेडिएशन बेहद कम होता है और इसे सेफ्टी गाइडलाइन्स के अनुरूप नियंत्रित किया जाता है। मोबाइल फोन का रेडियो ट्रांसमीटर भी लो-पावर होता है, जिसे सिर्फ आसपास के टावर से कम्युनिकेट करने के लिए डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिक शोध और सरकारी डेटा दोनों यह साबित करते हैं कि मोबाइल टावर से स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
भारत सरकार के सख्त नियम
भारत में 2008 से ही मोबाइल टावर सुरक्षा के सख्त नियम लागू हैं।
DoT ने इंटरनेशनल कमीशन ऑफ नॉन-आयनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (ICNIRP) के मानकों से 10 गुना सख्त लिमिट तय की है।
भारत में मोबाइल टावर की रेडिएशन लिमिट, WHO की सिफारिश की तुलना में सिर्फ 10वां हिस्सा है।
किसी भी टावर में रेडिएशन सीमा पार होती है तो उस पर ₹20 लाख का जुर्माना और टावर बंद करने की कार्रवाई होती है।
WHO ने भी किया खारिज
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने 25,000 से अधिक शोधों का अध्ययन कर साफ कहा है कि मोबाइल टावर और वायरलेस नेटवर्क से निकलने वाले कमजोर RF सिग्नल्स से स्वास्थ्य पर कोई नुकसान नहीं होता।
2006 (फैक्ट शीट 304): कमजोर रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल्स से स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं।
2013: मोबाइल टावर और RF फील्ड्स से कैंसर या अन्य बीमारियों का खतरा नहीं मिला।
2020 (5G नेटवर्क): वायरलेस तकनीक से स्वास्थ्य पर कोई नुकसानदेह प्रभाव साबित नहीं हुआ।
निष्कर्ष
मोबाइल टावर से कैंसर या किसी अन्य गंभीर बीमारी का डर केवल अफवाह और मिथक है। सरकार और WHO दोनों ने साफ किया है कि सुरक्षा मानकों के भीतर मोबाइल टावर सुरक्षित हैं, और जनता को इसके प्रति घबराने की जरूरत नहीं है।