Saturday, June 20

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भागीरथपुरा दूषित पानी मामला: निगम आयुक्त ने टेंडर पर सफाई दी, कहा– अमृत योजना के कारण काम रोका गया

 

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इंदौर: शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारियों और मौतों के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आ गया है। निगम आयुक्त दिलीप यादव ने कहा कि पाइपलाइन बदलने का अलग टेंडर डाला गया था, लेकिन यह कार्य अमृत योजना में पहले से स्वीकृत होने के कारण अलग से आगे नहीं बढ़ाया गया।

 

प्रारंभिक जांच में पाए गए दूषित सैंपल

 

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलते ही निगम ने पहले दिन ही करीब 100 सैंपल लिए। रिपोर्ट में पानी दूषित पाया गया। मुख्य लाइन के अलावा कई स्थानों पर ड्रेनेज या सीवरेज के पानी के मिल जाने की आशंका थी, जिन्हें चिन्हित कर सुधारात्मक कदम उठाए गए।

 

सीवरेज चैंबर और पाइपलाइन की जांच

 

भागीरथपुरा में करीब 2,000 से अधिक सीवरेज चैंबर हैं। इन सभी की जांच चल रही है। जहां पाइपलाइन और सीवरेज लाइन एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई पाइपलाइन डायवर्ट कर सुधार किया गया है। घर-घर जांच पूरा होने में दो-तीन दिन और लग सकते हैं।

 

टैंकर से पानी की आपूर्ति

 

एहतियातन, इलाके में टैंकर से साफ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। निगम प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि फिलहाल नलों का पानी न पिएं, और जरूरत पड़ने पर उबालकर ही उपयोग करें।

 

कार्रवाई और जिम्मेदारों को हटाया

 

निगम आयुक्त ने कहा कि शुरुआती जांच के आधार पर सब-इंजीनियर, सहायक यंत्री और जोनल अधिकारी को तत्काल हटा दिया गया है। इसके अलावा, कलेक्टर द्वारा जांच समिति गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

 

 

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