Thursday, May 14

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बेंगलुरु की इंजीनियर बनी ‘लेडी डॉन’आंध्र–ओडिशा से श्रीलंका तक फैला था शीलावती गांजा रैकेट, आठ गिरफ्तार

आईटी सिटी बेंगलुरु से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर गाडे रेणुका पर अंतरराज्यीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय गांजा तस्करी नेटवर्क चलाने का आरोप लगा है। पुलिस ने रेणुका सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और श्रीलंका तक फैले एक बड़े गांजा रैकेट का पर्दाफाश किया है। गिरोह में अपनी पकड़ और संचालन क्षमता के कारण रेणुका को सहयोगी ‘लेडी डॉन’ कहकर पुकारते थे।

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74 किलो गांजा के साथ गिरफ्तारी

 

अनाकापल्ली जिले के नथावरम क्षेत्र में पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। सूर्यकैलासा के पास पुलिस ने गिरोह को रोका, जहां से 74 किलोग्राम गांजा, एक कार और दो बाइक जब्त की गईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गांजा आंध्र–ओडिशा सीमा क्षेत्र से लाया गया था।

 

कैसे चलता था तस्करी का नेटवर्क

 

जांचकर्ताओं के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन रेणुका और उसके सहयोगी सूर्य कैलाश कर रहे थे। दोनों ने नरसिपटनम में एक मकान किराए पर लेकर उसे तस्करी का केंद्र बनाया था। गांजा ओडिशा के बलिमेला और चित्रकोंडा जैसे आदिवासी इलाकों से जुटाया जाता था, जहां उच्च गुणवत्ता वाली ‘शीलावती’ किस्म की गांजा पाई जाती है।

 

गिरोह में बेंगलुरु और कोयंबटूर के लोग भी शामिल थे, जिन्हें लॉजिस्टिक्स, पैकिंग और परिवहन की जिम्मेदारी दी गई थी। तस्करी के लिए बिचौलियों का इस्तेमाल किया जाता था और ड्राइवरों को अलग-अलग मार्गों से भेजा जाता था ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।

 

तमिलनाडु से श्रीलंका तक सप्लाई

 

पुलिस के अनुसार, गांजा पहले तमिलनाडु के राजपालयम जंक्शन के रास्ते पहुंचाया जाता था, जहां इसे छोटे पैकेटों में बांटा जाता था। इसके बाद कथित तौर पर स्थानीय तस्करों और समुद्री नेटवर्क के जरिए इसे श्रीलंका तक भेजा जाता था। अधिकारियों का कहना है कि आंध्र–ओडिशा क्षेत्र से श्रीलंका तक गांजा तस्करी का यह पहला बड़ा दर्ज मामला है।

 

कौन है ‘लेडी डॉन’ रेणुका

 

गाडे रेणुका मूल रूप से आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले की रहने वाली है और बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर चुकी है। पढ़ी-लिखी और तकनीकी पृष्ठभूमि होने के बावजूद वह संगठित अपराध की दुनिया में उतर गई। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क को संगठित करने, संपर्क साधने और सप्लाई चेन को नियंत्रित करने में रेणुका की भूमिका अहम थी, इसी वजह से गिरोह में उसकी पहचान ‘लेडी डॉन’ के रूप में बन गई।

 

जांच जारी, और गिरफ्तारियों की संभावना

 

पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और समुद्री तस्करी के रास्तों की जांच कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

 

यह मामला न सिर्फ मादक पदार्थ तस्करी की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे पढ़े-लिखे युवा भी अपराध की दलदल में फंसते जा रहे हैं।

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