Thursday, May 14

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देश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट का बड़ा खुलासा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर पांचवां सैंपल फेल

नई दिल्ली। देश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट की घटनाएँ अब भी आम हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच साल में जांचे गए हर पांच सैंपल में से एक में मिलावट पाई गई। राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 1.7 लाख से ज्यादा खाने के सैंपल असुरक्षित पाए गए, और मिलावटखोरों पर 257 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया।

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स्वास्थ्य मंत्रालय की सख्ती और निगरानी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि फूड सेफ्टी कानूनों को लागू करने में अब अधिक सख्ती बरती जा रही है। खास तौर पर उन उत्पादों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें मिलावट का खतरा ज्यादा होता है। इनमें दूध और दूध से बने उत्पाद, रेडी-टू-ईट फूड्स शामिल हैं। ये चीजें शहरों में खूब बिकती हैं और इनके सुरक्षा मानकों पर न खरे उतरने से उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

पिछले पांच साल में पूरे देश में करीब 8.7 लाख फूड सैंपल की जांच की गई। इनमें से 1.74 लाख से अधिक सैंपल सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे

रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम से बढ़ी पकड़

मंत्रालय ने बताया कि अब ‘रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम’ के जरिए जोखिम के स्तर के अनुसार जांच की जा रही है। इस प्रणाली से पहले से ज्यादा गड़बड़ियों का पता लगाया जा रहा है।

इन गड़बड़ियों के चलते लगभग 4,800 लोगों को सजा दी गई और उन पर भारी जुर्माना लगाया गया। सिर्फ इस साल अब तक 1.7 लाख सैंपल जांचे गए, जिनमें से 34,000 से ज्यादा सैंपल सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे

शहरी बाजारों पर खास निगरानी

शहरी बाजारों में खाने-पीने की चीजों की मांग ज्यादा होती है और सप्लाई चेन जटिल होती है। इसी कारण इन बाजारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि बड़ी संख्या में गड़बड़ियों का पकड़ा जाना निगरानी मजबूत होने का सबूत है, नियमों की अनुपालना में कमी का नहीं

स्वास्थ्य मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और पौष्टिक खाना पहुंचे, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।

देशवासियों के लिए संदेश साफ है: खाने-पीने की चीजों में मिलावट अब आसान नहीं, निगरानी बढ़ गई है और नियमों का पालन कराना प्राथमिकता है।

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