
नई दिल्ली/आदीस अबाबा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया की संसद को संबोधित करते हुए वैश्विक समुदाय को एक अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया तब तक आगे नहीं बढ़ सकती जब तक उसके सिस्टम अतीत में अटके रहें। पीएम मोदी ने विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के लिए साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया, जिसमें विकास और प्रगति के लिए सहयोग और एकजुटता को प्राथमिकता दी जाए।
पीएम मोदी का संदेश:
मोदी ने कहा कि भारत और इथियोपिया एक ऐसी दुनिया का सपना देखते हैं, जहां विकासशील देश किसी के खिलाफ नहीं बल्कि सबके लिए काम करें। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि वैश्विक निर्णय आज की वास्तविकताओं के अनुरूप होने चाहिए, न कि 1945 के ढांचे के अनुसार।
ग्लोबल साउथ और विकास साझाकरण:
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने वैश्विक विकास समझौते पर जोर दिया है, जिसमें टिकाऊ विकास, प्रौद्योगिकी साझाकरण, सस्ती वित्त व्यवस्था, क्षमता निर्माण और व्यापार को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने ‘अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर इनिशिएटिव’ का जिक्र किया, जिसका लक्ष्य एक मिलियन प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करना है और स्थानीय क्षमताओं का निर्माण करना है।
भारत और इथियोपिया की साझेदारी:
मोदी ने दोनों देशों को ग्लोबल साउथ के साथी यात्री बताते हुए कहा कि लोकतंत्र जीवन जीने का तरीका है, और बहस, असहमति और कानून के शासन के माध्यम से ही यह यात्रा आगे बढ़ती है। उन्होंने इथियोपियाई कहावत का हवाला दिया, “जब मकड़ी के जाले एक हो जाते हैं तो शेर को भी बांध सकते हैं,” और इसे भारत के नारे “जब दिल एक हो जाते हैं, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं” के साथ जोड़ा।
सहयोग और एकजुटता की ताकत:
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एकजुटता ही ताकत है और सहयोग ही शक्ति है। भारत और इथियोपिया साथ खड़े हैं और एक अधिक न्यायसंगत, समान और शांतिपूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।
भारत-आफ्रीका संबंधों में मजबूती:
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और अफ्रीका के बीच संबंध उनके कार्यकाल में कई गुना बढ़े हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि BRICS में इथियोपिया के पूर्ण सदस्य बनने और G20 में अफ्रीकी संघ के स्थायी सदस्य बनने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं।
साझा परियोजनाओं और प्रस्तावों पर चर्चा:
मोदी ने रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन जॉब्स, आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे, जैव-ईंधन और जलवायु न्याय के लिए सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत 2027 में COP-32 में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने के इथियोपिया के प्रयासों का समर्थन करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण वैश्विक एकजुटता, सहयोग और विकास में न्यायसंगत हिस्सेदारी का मजबूत संदेश बनकर उभरा।