
खाबरोवस्क: रूस ने जापान के नजदीक अपने एयरबेस पर Su-57 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों की तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस के रशियन एयरोस्पेस फोर्सेज ने खाबरोवस्क इलाके के द्ज़्योमगी एयर बेस पर कम से कम 15 Su-57 विमानों को तैनात किया है। यह एयर बेस रूस के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है और यहां पहले Su-35S और MiG-31BM इंटरसेप्टर भी तैनात थे।
Su-57 तैनाती का मकसद
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य पड़ोसी जापान को सशक्त संदेश देना है। जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के सत्ता में आने के बाद अमेरिका-जापान गठबंधन और मजबूत हो सकता है। ऐसे में Su-57 विमानों की तैनाती अमेरिकी एयरफोर्स के F-35 और F-22 फाइटर्स को चुनौती देने और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
एयरफोर्स की तैयारी और प्रशिक्षण
Su-57 विमानों को Su-35 फाइटर्स और MiG-31 इंटरसेप्टर्स के साथ बेस पर तैनात किया गया है। MiG-31 में बड़े सेंसर्स लगे होते हैं और यह एयरबोर्न कमांड पोस्ट के रूप में काम कर सकता है। Su-57 विमानों को पुराने टाइप के विमानों के साथ एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इस तरह रूस नए स्टील्थ फाइटर्स को जापान और प्रशांत महासागर क्षेत्र में टोही और एस्कॉर्ट मिशनों के लिए तैयार कर रहा है।
Su-57 की ताकत और रेंज
Su-57 विमानों की रेंज किसी भी मौजूदा फाइटर से लंबी है और उनका कॉम्बैट रेडियस अमेरिकी F-35 और F-22 से दोगुना है। इन विमानों का इस्तेमाल जापानी इलाके के पास बॉम्बर और टोही ऑपरेशन के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, AL-51F नेक्स्ट जेनरेशन इंजन की देरी अभी तक इनके प्रदर्शन को पूरी तरह सक्षम नहीं बना पाई है।
रणनीतिक निहितार्थ
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस की यह तैनाती प्रशांत क्षेत्र में सैन्य संतुलन बनाए रखने, जापान को चेताने और अमेरिकी एयरफोर्स की मौजूदगी को चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा है। Su-57 विमानों की मौजूदगी रूस को इस क्षेत्र में एयर-सुपीरियरिटी और टोही मिशनों में बढ़त दिला सकती है।
