
तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है। यह बयान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी ने इस्लामिक क्रांति की 47वीं सालगिरह के मौके पर दिया। शमखानी ने कहा कि देश की मिसाइल क्षमताओं पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अमेरिका के साथ तनाव जारी
पिछले सप्ताह ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। ईरान का कहना है कि बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित रहेगी, जबकि अमेरिका चाहता है कि बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय गठबंधन भी वार्ता में शामिल हों। इस पर दोनों पक्षों में गतिरोध देखा जा रहा है।
ट्रंप की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान उनकी शर्तें नहीं मानेगा, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने चेताया, “या तो डील होगी या पिछले मुकाबले जैसा बहुत बड़ा कदम उठाना पड़ेगा।” इस बीच, अमेरिकी नौसैनिक बेड़े का एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट के पानी में पहुंच चुका है।
ईरान का मिसाइल प्रोग्राम
अमेरिकी प्रतिबंधों और इजरायल से खतरों के बीच, ईरान ने अपने मिसाइल कार्यक्रम को तेज किया है। अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस के मुताबिक, ईरान के पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल भंडार है।
ईरान की मिसाइलें और उनकी रेंज:
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सेजिल मिसाइल – 1500-2500 किमी
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इमाद मिसाइल – 1700 किमी
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गदर मिसाइल – 2000 किमी
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शहाब मिसाइल – 1300 किमी
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खुर्रमशहर मिसाइल – 2000 किमी
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होवेजह मिसाइल – 1350 किमी
ईरान की कई मिसाइल साइटें तेहरान और आसपास के प्रांतों में स्थित हैं, जबकि केरमानशाह और सेमनाम में कम से कम पांच अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी हैं। अप्रैल 2025 में ईरानी मीडिया ने खुलासा किया था कि उनके पास 9 ऐसी मिसाइलें हैं, जो इजरायल तक पहुंच सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और मिसाइल क्षमता का संतुलन मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।
