Thursday, May 14

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बिहार में एनडीए जीत के बाद चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा में सियासी खींचतान, नेताओं का पलायन जारी

पटना: बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद राजनीतिक हलकों में अंदरूनी खींचतान देखने को मिल रही है। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा के कई वरिष्ठ नेता अब उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) में शामिल हो रहे हैं। हाल में लोजपा आर के कई चर्चित नेताओं ने चिराग पासवान की पार्टी छोड़कर उपेंद्र कुशवाहा का दामन थामा है, जिससे चिराग पासवान की पार्टी के भीतर खलबली मची हुई है।

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एनडीए के भीतर सियासी खेल:
एनडीए की जीत के बावजूद चिराग पासवान की पार्टी के कई नेताओं का उपेंद्र कुशवाहा के पाले में जाना सियासी विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। लोजपा आर के वरिष्ठ नेताओं में एके वाजपेयी का नाम शामिल है, जो पहले पार्टी प्रवक्ता और वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने इन नेताओं को अपनी पार्टी में प्राथमिक सदस्यता दिलाई है और इसे एनडीए के हित में बताया।

चिराग पासवान की पार्टी पर असर:
चिराग पासवान की पार्टी ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन हालिया पलायन ने पार्टी की ताकत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। एके वाजपेयी ने मीडिया से कहा कि उन्हें चिराग पासवान की क्षमता में कमी नजर आने लगी थी और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची। यही कारण है कि उन्होंने राष्ट्रीय लोक मोर्चा में वापसी का फैसला किया।

सियासी माहौल:
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंदरूनी खींचतान एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। एक यूजर ने लिखा कि सभी फर्जी लोगों को पार्टी में शामिल कर लिया है, वहीं दूसरे ने सवाल उठाया कि क्या सभी एक ही दल के थे।

अगला चरण:
चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा दोनों एनडीए के मुख्य हिस्से हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया से साफ किया कि पार्टी तोड़ने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि एनडीए के भीतर यह खींचतान अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में इसके और असर दिखाई देंगे।

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