Thursday, May 14

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मध्य प्रदेश में 40 साल बाद ‘लाल आतंक’ का अंत: आखिरी दो नक्सलियों ने सरेंडर किया, 41 जवानों ने दी शहादत

बालाघाट। मध्य प्रदेश अब पूरी तरह नक्सलवाद मुक्त हो गया है। राज्य में लाल आतंक को खत्म करने की दिशा में आखिरी दो बचे नक्सली दीपक और रोहित ने गुरुवार को बालाघाट के कोरका क्षेत्र में सीआरपीएफ शिविर में हथियार डालकर सरेंडर किया। दीपक पर 29 लाख और रोहित पर 14 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इनके सरेंडर के साथ ही राज्य के नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा।

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सरेंडर की घटनाओं ने दिया सकारात्मक संदेश

सीएम मोहन यादव ने कहा कि अब मध्य प्रदेश पूरी तरह से नक्सलवाद से मुक्त हो गया है। उन्होंने जवानों के साहस और बलिदान को सलाम करते हुए कहा कि 11 दिसंबर को बालाघाट से लाल सलाम को आखिरी सलाम है।

सीएम ने यह भी बताया कि पिछले 42 दिनों में एमपी, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जोन में 42 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिन पर कुल 7.75 करोड़ रुपए का इनाम था। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया।

41 जवानों ने शहादत दी

बालाघाट और आसपास के क्षेत्र में 1990 के दशक से नक्सल गतिविधियां सक्रिय थीं। इसके दौरान कुल 41 सुरक्षाबलों ने अपने प्राणों की आहुति दी। बालाघाट में 1991 में हुए पहले ब्लास्ट के समय नौ जवान शहीद हुए थे। इसके बाद लगातार नक्सलियों की सक्रियता रही, लेकिन अब राज्य की धरती पूरी तरह सुरक्षित हो गई है।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों की पहचान और स्थिति

  • दीपक: पालागोंड़ी का निवासी, लंबे समय से नक्सल गतिविधियों में सक्रिय।
  • रोहित: सरेंडर करने वाले अन्य नक्सली।

सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई तथा लगातार दबाव के कारण इनका सरेंडर संभव हुआ। सीएम ने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों के सामने अब दो ही विकल्प हैं – नया जीवन या जीवन की समाप्ति।

विशेष टिप्पणी: यह घटना मध्य प्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी और राज्य की सुरक्षा एवं विकास के लिए एक मजबूत संदेश है।

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