Friday, May 15

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12 की उम्र में शादी, 13 में मां… अब फांसी की सजा! गोली कोहकान की दिल दहलाने वाली दास्तां

ईरान की बलूच महिला गोली कोहकान की कहानी किसी भी इंसान को भीतर तक झकझोर देती है। मासूम उम्र में गुड्डे–गुड़ियों से खेलने वाली यह बच्ची उस उम्र में मां बन गई, जब वह खुद बचपन की दहलीज पर थी। आज 25 साल की हो चुकी गोली कोहकान मौत की सजा का सामना कर रही है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि उसे कभी भी फांसी दी जा सकती है।

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यह मामला सिर्फ एक महिला का नहीं, बल्कि बाल विवाह, घरेलू हिंसा और लैंगिक अन्याय की भयावह तस्वीर पेश करता है।

12 साल में शादी, 13 में मां बनने की मजबूरी

गोली कोहकान महज 12 साल की थी जब उसे उसके ही चचेरे भाई से जबरन शादी कर दी गई। न उम्र समझने की, न ही रिश्तों की समझ… और अगले ही साल 13 साल की उम्र में वह मां बन गई।
बिना किसी मेडिकल सुविधा के उसने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया।

पति का रोजाना अत्याचार—हिंसा की इंतहा

कम उम्र में शादी और मातृत्व का बोझ ही काफी नहीं था।
उसका पति उसे रोज मारता, पीटता, मानसिक और शारीरिक यातनाएं देता था।
गोली सालों से यह सब सहती रही—मगर सब्र की भी एक हद होती है।

2018: बेटे को पिटते देख टूटा सब्र

मई 2018 में, जब गोली 18 साल की थी, उसके पति ने फिर घर में झगड़ा शुरू किया। इस बार उसने गोली के 5 साल के बेटे को भी बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
अपने बच्चे पर होते अत्याचार को देखकर गोली टूट गई। उसने मदद के लिए एक रिश्तेदार को बुलाया। झगड़ा इतना बढ़ा कि गोली पर पति की हत्या का आरोप लगा।

अब फांसी की सजा—UN भी बोला अन्याय

कई सालों से अदालत में केस चल रहा था, और अब गोली कोहकान को मौत की सजा सुना दी गई है।
संयुक्त राष्ट्र के 8 स्वतंत्र विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला
“ईरान की न्याय व्यवस्था में बाल विवाह और घरेलू हिंसा झेल चुकी महिलाओं के प्रति भेदभाव का सबसे कड़ा उदाहरण है।”
यदि गोली को फांसी दी गई, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का सीधा उल्लंघन होगा।

अनपढ़ महिला, कानूनी मदद से दूर

गोली कोहकान न तो पढ़ी-लिखी है और न ही उसके पास कानूनी सहायता पहुँच पाई।
उस पर हत्या का आरोप कबूलने के लिए दबाव डाला गया।

फांसी रोकने की एक ही शर्त: 90,000 डॉलर का ‘ब्लड मनी’!

अदालत ने कहा—
यदि गोली अपने पति के परिवार को Blood Money (दीयत) दे दे, तो सजा माफ हो सकती है।
लेकिन उससे मांगा गया रकम—90,000 डॉलर (करीब 81 लाख रुपये)—अनुशंसित दर से कई गुना अधिक है।
एक गरीब, अनपढ़ महिला के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना असंभव है।

निष्कर्ष

गोली कोहकान की कहानी सिर्फ एक महिला की त्रासदी नहीं, बल्कि दुनिया के उन कोनों की भी सच्चाई है जहाँ बचपन, अधिकार और न्याय—सब कुछ छीन लिया जाता है।
आज वह मौत के मुहाने पर खड़ी है, जबकि दुनिया उसकी रक्षा की गुहार लगा रही है।

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