Friday, May 15

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हमारा काम पर्यावरण बचाना है, जमीन के पट्टे बांटना नहीं: NGT ने भोपाल BMC को फटकार

भोपाल: भोपाल के भोज वेटलैंड की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। भदभदा क्षेत्र में तालाब किनारे फैले अतिक्रमण मामले में NGT ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है, न कि जमीन के मालिकाना हक़ का फैसला।

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स्थानीय विरोध से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रुकी

NGT की भोपाल बेंच ने भोपाल नगर निगम (BMC) के वकील गुंजन चौक्सी द्वारा दायर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) की समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार 35 अतिक्रमणों में से 9 हटाए गए, लेकिन बाकी मामले स्थानीय लोगों के विरोध और जमीन के मालिकाना हक़ के विवाद के कारण रुके हुए हैं।

भोज वेटलैंड एक अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर स्थल है, जिस पर भोपाल के लोग पानी के लिए निर्भर हैं। यह क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण और शहर की जलवायु सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। NGT ने जोर देकर कहा कि इस तरह के वेटलैंड को अतिक्रमण या नुकसान से बचाना प्राथमिक जिम्मेदारी है।

BMC को दो हफ्तों में रिपोर्ट जमा करने का निर्देश

न्यायिक सदस्य जस्टिस शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने स्पष्ट किया कि जमीन के मालिकाना हक़ का फैसला राजस्व अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आता है। NGT ने BMC को दो हफ़्तों के भीतर नवीन एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया।

याचिका और अगली सुनवाई

इस याचिका को 2021 में आर्या श्रीवास्तव ने दायर किया था, जब वे NLIU की छात्रा थीं। याचिकाकर्ता के वकील धर्मवीर शर्मा ने तर्क दिया कि जमीन पर अधिकार के मामलों के लिए संबंधित पक्षों को राजस्व अदालत का रुख करना चाहिए।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अतिक्रमणकारों द्वारा दायर रिट याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। NGT ने अगली सुनवाई 7 अप्रैल को तय की है।

निष्कर्ष: NGT ने स्पष्ट किया कि भोपाल के भोज वेटलैंड की सुरक्षा सर्वोपरि है। अतिक्रमण रोकने और पर्यावरण की रक्षा करने के लिए BMC को कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

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