
मुजफ्फरपुर: उत्तर भारतीय महिलाओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में बिहार की अदालत ने तमिलनाडु के DMK सांसद दयानिधि मारन को तलब किया है। मुजफ्फरपुर की अदालत ने उन्हें 23 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। समन 13 फरवरी को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजा गया।
अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा द्वारा दायर परिवाद में कहा गया है कि मारन का बयान न केवल उत्तर भारतीय महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि यह देश की एकता को प्रभावित कर क्षेत्रीय विद्वेष और नफरत फैलाने की कोशिश भी है। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 75 और 79 (महिला की गरिमा और अपमान), धारा 192 और 298 (धार्मिक या क्षेत्रीय भावनाओं को ठेस), तथा धारा 352 और 251(2) (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) के तहत समन जारी किया।
क्या कहा था सांसद दयानिधि मारन ने?
14 जनवरी को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में दयानिधि मारन ने कहा था कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जबकि उत्तर भारत में उन्हें घर में रहकर खाना बनाने और बच्चे पैदा करने तक सीमित रखा जाता है। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में हम लड़कियों को पढ़ने के लिए कहते हैं। लेकिन उत्तर भारत में क्या कहा जाता है? वे कहते हैं कि लड़कियों को घर पर रहना चाहिए, रसोई संभालनी चाहिए, बच्चे पैदा करने चाहिए। यही तुम्हारा काम है।”
सांसद दयानिधि मारन कौन हैं?
दयानिधि मारन तमिलनाडु के सीनियर राजनेता और DMK पार्टी के सांसद हैं। वे चेन्नई सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार लोकसभा सांसद बने हैं। केंद्र की UPA सरकार में उन्होंने सूचना एवं प्रसारण, दूरसंचार और कपड़ा मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। दिवंगत मुरासोली मारन के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के पोते होने के नाते उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव काफी मजबूत है।
बिहार की अदालत में 23 फरवरी को सुनवाई होगी, जिसमें सांसद को व्यक्तिगत रूप से अपनी सफाई प्रस्तुत करनी होगी।
