
नई दिल्ली/अबू धाबी: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग और ब्रह्मोस मिसाइल सौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। UAE भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल खरीदने का इच्छुक है, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें अभी भी हैं।
सूत्रों के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री को लेकर MTCR (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम) नियम एक चुनौती बन रहा है। UAE इस संगठन का सदस्य नहीं है, इसलिए भारत और UAE के बीच ‘सरकार से सरकार’ स्तर पर सौदा अंतिम रूप देने के लिए विशेष प्रावधानों और अनुमतियों पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, रूस से भी संबंधित मंजूरी आवश्यक है, क्योंकि ब्रह्मोस का निर्माण भारत-रूस साझेदारी में होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रह्मोस मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी ताकत साबित की है और दुनिया के कई देशों की मांग बढ़ा दी है। फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस खरीद चुका है और नए ऑर्डर भी दिए जा चुके हैं।
वहीं, पाकिस्तान लगातार JF-17 लड़ाकू विमान की बिक्री का दावा कर रहा है। उसने इंडोनेशिया, सऊदी अरब और अन्य देशों को अपने JF-17 बेचने का प्रचार किया, लेकिन सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञ इसे झूठा मानते हैं। UAE ने पाकिस्तान के इस प्रयास को ठुकराते हुए भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने पर ध्यान केंद्रित किया।
कुछ दिन पहले UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) ने भारत का दौरा किया। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा उद्योग में सहयोग को बढ़ाने और हथियार निर्माण में साझेदारी करने के समझौते पर चर्चा की। सूत्रों का कहना है कि UAE भारत की उभरती डिफेंस इंडस्ट्री और सैन्य ताकत में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है।