Thursday, June 18

This slideshow requires JavaScript.

7 साल की भव्या चौधरी ने संभाली परिवार की विरासत, पगड़ी रस्म से ग्रहण किया उत्तराधिकार

 

This slideshow requires JavaScript.

जयपुर: राजस्थान में सामाजिक रीति-रिवाजों और परिवारिक परंपराओं के बीच 7 साल की मासूम भव्या चौधरी ने अपने घर की जिम्मेदारी संभालकर सबका दिल जीत लिया है। पिता और दादा के निधन के बाद परिवार में कोई पुरुष सदस्य न बचा, तो भव्या ने पगड़ी की रस्म निभाते हुए परिवार की उत्तराधिकारी के रूप में दायित्व ग्रहण किया।

 

6 महीने की उम्र में पिता की शहादत

भव्या चौधरी जब मात्र 6 महीने की थी, तब उनके पिता हनुमान सहाय चौधरी, राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल, का निधन हो गया। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टोंक चुनावी सभा से एक दिन पहले सुरक्षा ड्यूटी पर ब्रेन हेमरेज हुआ था। तमाम इलाज के बावजूद 27 फरवरी 2019 को उनका निधन हो गया।

 

दादा के जाने के बाद परिवार में कोई पुरुष नहीं

पिता के बाद भव्या अपने दादा-दादी की गोद में बड़ी हो रही थी। अब 7 वर्ष की उम्र में उनके दादा रामरख चौधरी का निधन भी हो गया। इसके बाद भव्या ने अपनी मां सीमा चौधरी और दादी हगमा देवी के साथ घर की जिम्मेदारियां संभाली। नाना श्योकरण चौधरी, मामा बालकिशन और अन्य रिश्तेदार भी उसे सहारा दे रहे हैं।

 

पगड़ी की रस्म के माध्यम से उत्तराधिकार ग्रहण

सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार, उत्तराधिकारी को पगड़ी की रस्म से जिम्मेदारी सौंपी जाती है। दादा के निधन के बाद भव्या ने यह रस्म निभाई और परिवार की जिम्मेदारी अपने छोटे कंधों पर ली। 7 वर्षीय भव्या वर्तमान में अमेरिकन इंटरनेशनल स्कूल, मानसरोवर की कक्षा तीन में पढ़ती हैं।

 

मां भी हैं पुलिस कांस्टेबल

भव्या की मां सीमा चौधरी भी राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल हैं। वह वर्तमान में जयपुर के घाटगेट स्थित साइबर थाने में तैनात हैं। पिता और मां दोनों के पुलिस सेवक होने के बीच भव्या ने नन्ही उम्र में ही साहस और जिम्मेदारी का परिचय दिया है।

 

भव्या की कहानी न केवल परिवार की विरासत को निभाने की मिसाल है, बल्कि समाज में बदलते दृष्टिकोण और नारी शक्ति की सजीव झलक भी प्रस्तुत करती है।

 

Leave a Reply