Tuesday, January 20

सक्सेस स्टोरी: 48 की उम्र में नौकरी छोड़ी, ₹1 लाख से शुरू किया काम, अब कंपनी का टर्नओवर ₹15 करोड़

नई दिल्ली।
चेन्नई के लोकेश्वरन कन्नन ने साबित कर दिया कि सफलता की कोई उम्र नहीं होती। 48 साल की उम्र में जमी-जमाई नौकरी छोड़कर उन्होंने अपनी कंपनी eOrbitor की शुरुआत की थी। तब लोग उन्हें ‘पागल’ कह रहे थे, लेकिन आज उनकी मेहनत और दूरदर्शिता ने उन्हें आईटी जगत का भरोसेमंद नाम बना दिया है।

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सिर्फ ₹1 लाख से शुरुआत
लोकेश्वरन ने 2019 में eOrbitor की नींव रखी थी। केवल ₹1 लाख की पूंजी, एक टेबल, एक कुर्सी और एक पंखे के साथ उन्होंने अपना सफर शुरू किया। कंपनी शुरू होने के 40 दिनों के भीतर ही कोरोना लॉकडाउन लग गया। जहां कई बड़ी आईटी कंपनियां ठप हो रही थीं, लोकेश्वरन ने इसे अवसर में बदल दिया और डेटा सेंटर मेंटेनेंस जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया। उनका पहला ऑर्डर महज ₹14,000 का फायरवॉल सपोर्ट था, लेकिन जल्द ही मेहनत और भरोसे के दम पर करोड़ों के अनुबंध मिलने लगे।

दिग्गजों का भरोसा
आज उनकी कंपनी आईटी क्षेत्र में एक ‘डॉक्टर’ की भूमिका निभाती है। बड़े डेटा सेंटर क्रैश होने पर उनकी टीम मिनटों में समस्या हल कर देती है। इसी भरोसे के चलते गुजरात मेट्रो, हैदराबाद पुलिस कमांड सेंटर (18,000 कैमरे), अशोक लेलैंड और जोहो जैसे बड़े क्लाइंट उनके साथ जुड़े हैं। eOrbitor सिर्फ सामान नहीं बेचती, बल्कि लंबी अवधि की साझेदारी और सेवाओं पर ध्यान देती है।

आज 15 करोड़ का टर्नओवर
1 लाख रुपये से शुरू हुआ यह सफर अब 15 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। अगले वर्ष इसे 30 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य है। लोकेश्वरन का मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र वित्तीय अनुशासन है। वे वेंडर्स को समय पर पेमेंट करते हैं और कर्मचारियों को महीने की पहली तारीख को सैलरी देते हैं। इसी भरोसे के कारण बैंकों ने बिना किसी प्रॉपर्टी मॉर्टगेज के 5 करोड़ रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी दी।

देशविदेश में विस्तार
eOrbitor आज भारत के 11 शहरों में मौजूद है और फरवरी 2025 से यूएई (शारजाह, दुबई, अबू धाबी) में भी परिचालन शुरू कर दिया है। कंपनी ने 5-डे वर्किंग वीक और कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस जैसी नीतियों के माध्यम से कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोपरि रखा है। लोकेश्वरन के लिए सफलता का मतलब सिर्फ मुनाफा नहीं, बल्कि उन 50 से अधिक परिवारों की खुशहाली भी है जो उनकी कंपनी से जुड़े हैं।

लोकेश्वरन कन्नन की कहानी यह संदेश देती है कि मजबूत इरादे, मेहनत और अनुशासन से किसी भी उम्र में बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

 

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