
ढाका: बांग्लादेश में 17 फरवरी को होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कट्टरपंथी हिंसा और भड़काऊ बयानबाजी ने फिर से तूल पकड़ लिया है। हाल के हफ्तों में कम से कम पांच हिंदुओं की हत्या की खबरें सामने आई हैं और दर्जनों घरों को आग के हवाले किया गया। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें मौलाना और राजनीतिक नेता हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान दे रहे हैं।
मौलाना ने कहा: हिंदुओं को वोट देना हराम
एक वायरल वीडियो में मौलाना से पूछा गया कि “क्या चुनाव में किसी हिंदू उम्मीदवार या हिंदू पार्टी को वोट दिया जा सकता है?” इस पर मौलाना ने स्पष्ट रूप से कहा, “नहीं, यह हराम है। हिंदुओं, काफिरों को वोट देना किसी भी तरीके से जायज नहीं है।” उन्होंने यह संदेश बार-बार दोहराया।
धमकियों से भरा सोशल मीडिया
वहीं, एक और वीडियो में कट्टरपंथी हिंदू धार्मिक स्थलों और मंदिरों को नष्ट करने की खुलेआम धमकी देते नजर आए। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में मंदिर नष्ट करने के लिए हैं, उनकी मूर्तियां तोड़ देने के लिए हैं। कोई भी हिंदू बांग्लादेश में नहीं रह सकता।” यह घटनाक्रम 2024 के अगस्त में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद शुरू हुए हिंसक संघर्ष के संदर्भ में आया है।
हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का बढ़ता असर
पिछले एक सवा महीने में कई हिंदू नागरिकों की भीड़ ने हत्या की और घरों को तोड़कर आग लगा दी। भारत समेत कई देशों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की निंदा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि “चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के साथ लगातार हमलों का पैटर्न परेशान करने वाला है। ऐसे मामलों से तेजी और सख्ती से निपटा जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि “सांप्रदायिक हमलों को निजी दुश्मनी या राजनीतिक मतभेदों से जोड़ने की प्रवृत्ति, अपराधियों को बढ़ावा देती है और अल्पसंख्यकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना को गहरा करती है।”
अधिकारियों की चेतावनी
विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से कट्टरपंथियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है। वहीं, मौलानों और नेताओं की भड़काऊ बयानबाजी से न केवल हिंदू समुदाय भयभीत है बल्कि पूरे देश में चुनावी माहौल भी तनावपूर्ण बना हुआ है।