
ईरान में उग्र प्रदर्शनों के बीच सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी हैं। यह कोई नई बात नहीं है। जब भी किसी देश में हालात बेकाबू होते हैं, कई सरकारें जनता की आवाज़ और सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए इंटरनेट बंद करने का सहारा लेती हैं। लेकिन सवाल यह है कि आख़िर सरकारें इतनी बड़ी व्यवस्था को एक साथ कैसे बंद कर देती हैं? इसके पीछे कौन-सी तकनीकें काम करती हैं?
इंटरनेट बंद करने के दो प्रमुख तरीके
तकनीकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया भर में सरकारें आमतौर पर इंटरनेट बंद करने के लिए दो मुख्य तरीकों का इस्तेमाल करती हैं—
- रूटिंग डिस्रप्शन (Routing Disruption)
- पैकेट फ़िल्टरिंग (Packet Filtering)
हालात जितने ज़्यादा गंभीर होते हैं, तरीका उतना ही सख़्त अपनाया जाता है।
क्या है रूटिंग डिस्रप्शन?
रूटिंग डिस्रप्शन इंटरनेट बंद करने का सबसे असरदार और व्यापक तरीका माना जाता है। इंटरनेट की दुनिया में हर देश, कंपनी और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) एक ऑटोनॉमस सिस्टम (Autonomous System) के तहत काम करता है।
इन ऑटोनॉमस सिस्टम्स के बीच रास्ता तय करने का काम बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (BGP) करता है। यही प्रोटोकॉल तय करता है कि डेटा किस रास्ते से किस नेटवर्क तक पहुंचेगा।
जब किसी देश के प्रमुख इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर अपने BGP रूट्स को इंटरनेट से हटा लेते हैं, तो उनके नियंत्रण में आने वाले सभी IP एड्रेस वैश्विक इंटरनेट से गायब हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि
- बाहरी नेटवर्क उस देश तक नहीं पहुंच पाते
- और देश के भीतर मौजूद यूज़र्स की इंटरनेट कनेक्टिविटी पूरी तरह टूट जाती है
सरल शब्दों में कहें तो देश का डिजिटल रास्ता ही बंद कर दिया जाता है। यही वजह है कि उग्र प्रदर्शनों या आपात हालात में सरकारें इसी तरीके का सहारा लेती हैं।
पैकेट फ़िल्टरिंग क्या होती है?
पैकेट फ़िल्टरिंग अपेक्षाकृत सीमित दायरे में इस्तेमाल की जाती है। इसका मकसद पूरे इंटरनेट को बंद करना नहीं, बल्कि
- किसी खास वेबसाइट
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
- या विशेष तरह के कंटेंट
को ब्लॉक करना होता है।
कुछ सरकारें इसके लिए डीप पैकेट इंस्पेक्शन (Deep Packet Inspection – DPI) जैसी उन्नत तकनीक का भी इस्तेमाल करती हैं। इसमें डेटा पैकेट्स की गहराई से जांच कर यह तय किया जाता है कि कौन-सा कंटेंट यूज़र तक पहुंचे और कौन-सा नहीं।
क्यों चुना जाता है रूटिंग डिस्रप्शन?
जब विरोध प्रदर्शन उग्र हो जाते हैं और हालात सरकार के नियंत्रण से बाहर होने लगते हैं, तब केवल वेबसाइट ब्लॉक करना काफी नहीं होता। ऐसे समय में
रूटिंग डिस्रप्शन सबसे तेज़, प्रभावी और व्यापक तरीका माना जाता है, क्योंकि इससे एक झटके में पूरे देश की इंटरनेट कनेक्टिविटी ठप की जा सकती है।
निष्कर्ष
ईरान में इंटरनेट बंद होना सिर्फ़ एक तकनीकी फैसला नहीं, बल्कि सत्ता और सूचना के नियंत्रण की लड़ाई का हिस्सा है। इंटरनेट आज सिर्फ़ संचार का माध्यम नहीं, बल्कि विरोध, संगठन और जनमत निर्माण का सबसे ताकतवर हथियार बन चुका है। यही वजह है कि संकट के समय सरकारें सबसे पहले इसी पर लगाम कसती हैं।