
कैंसर का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय पैदा हो जाता है, लेकिन महिलाओं में होने वाला एक ऐसा कैंसर भी है, जिसे समय रहते रोका जा सकता है और शुरुआती चरण में पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है। यह कैंसर है सर्वाइकल कैंसर, जो दुनिया भर में महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर माना जाता है।
जस्लोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट एवं फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शिल्पा अग्रवाल के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) में शुरू होता है। जब सर्विक्स की कोशिकाओं में असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है, तो यह कैंसर का रूप ले लेती है। दुर्भाग्य से, संसाधनों की कमी वाले क्षेत्रों में यह आज भी महिलाओं की मृत्यु का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
लगभग एक ही कारण जिम्मेदार
सर्वाइकल कैंसर के अधिकतर मामलों के पीछे ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण जिम्मेदार होता है। एचपीवी के कई प्रकार होते हैं, लेकिन टाइप 16 और 18 दुनिया भर में पाए जाने वाले लगभग 75 प्रतिशत से अधिक मामलों का कारण बनते हैं। लंबे समय तक बना रहने वाला एचपीवी संक्रमण सर्विक्स की कोशिकाओं में गंभीर बदलाव पैदा कर सकता है, जो समय के साथ कैंसर में बदल सकता है।
बचाव के दो सबसे प्रभावी तरीके
सर्वाइकल कैंसर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए दो उपाय बेहद कारगर हैं—
- एचपीवी वैक्सीन लगवाना और सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना।
- नियमित स्क्रीनिंग जांच कराना, जिससे बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सके।
कौन से टेस्ट आते हैं काम?
सर्वाइकल कैंसर की पहचान और रोकथाम के लिए मुख्य रूप से दो जांच की जाती हैं—
- एचपीवी टेस्ट: इससे यह पता चलता है कि शरीर में हाई-रिस्क या लो-रिस्क एचपीवी वायरस मौजूद है या नहीं।
- पैप स्मीयर टेस्ट: इससे सर्विक्स की कोशिकाओं में हो रहे शुरुआती बदलावों की पहचान की जाती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं।
कब और किसे जांच करानी चाहिए?
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन्स के अनुसार—
- 21 वर्ष की उम्र से पैप स्मीयर जांच शुरू कर देनी चाहिए।
- यह जांच 65 वर्ष की उम्र तक जारी रखी जानी चाहिए।
- 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को नियमित एचपीवी टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती।
- जांच का अंतराल रिपोर्ट के अनुसार 3 से 5 वर्ष का हो सकता है।
- यदि रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी आती है, तो डॉक्टर कोल्पोस्कोपी जैसी उन्नत जांच की सलाह दे सकते हैं।
इन महिलाओं को रहना चाहिए ज्यादा सतर्क
कुछ कारण ऐसे हैं, जिनसे सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है—
- कई यौन साथी होना
- कम उम्र में यौन गतिविधि की शुरुआत
- यौन संचारित संक्रमणों का इतिहास
- अधिक बच्चों का जन्म
- एचआईवी संक्रमण
- जननांग संक्रमणों का सह-संक्रमण
- धूम्रपान की आदत
- लंबे समय तक ओरल गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल
निष्कर्ष
सर्वाइकल कैंसर भले ही गंभीर बीमारी हो, लेकिन एचपीवी वैक्सीन और नियमित जांच से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। समय पर जागरूकता और सही कदम उठाकर हजारों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी जांच या उपचार से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।