
नई दिल्ली: खेती-बाड़ी के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति लगातार नयी दिशा ले रही है। चीन के वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड धान की एक नई किस्म विकसित की है, जो खुद को बीजों के माध्यम से दोहरा सकती है। इसे ‘सेल्फ-रेप्लिकेटिंग सुपर राइस’ यानी खुद को दोहराने वाला सुपर चावल कहा जा रहा है।
धान की खेती में क्रांति:
संपूर्ण दुनिया में हाइब्रिड धान की खेती में सबसे बड़ी चुनौती किसानों के लिए हर फसल में महंगे नए बीज खरीदना है। इस नई किस्म में अपोमिक्सिस नामक प्रक्रिया से बीज निषेचन के बिना विकसित होते हैं, जिससे हर फसल के लिए नए हाइब्रिड बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे किसानों की लागत भी कम होगी।
उपज में चार गुना वृद्धि:
इस नई हाइब्रिड किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उच्च उपज है। पारंपरिक किस्मों की तुलना में यह धान चार गुना अधिक चावल दे सकता है। अगर दुनिया भर में इसे अपनाया जाए, तो वैश्विक धान उत्पादन दोगुना हो सकता है।
कौन कर रहा है विकास:
चाइना नेशनल राइस रिसर्च इंस्टीच्यूट के वैज्ञानिक वांग केजियान के नेतृत्व में यह खोज की गई है। इस नई ‘फिक्स8’ (Fix8) श्रृंखला ने 99.7 प्रतिशत से अधिक क्लोनिंग दक्षता हासिल की है और यह पारंपरिक हाइब्रिड बीज के समान उपज देने में सक्षम है।
कीमत और किसान के लिए लाभ:
शुरुआती कीमत चीन में 200 युआन (लगभग 28 अमेरिकी डॉलर) प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। लेकिन वन-लाइन सिस्टम के माध्यम से उत्पादन लागत लगभग 99 प्रतिशत तक कम की जा सकती है। इससे बीज की कीमत सामान्य धान बीजों के बराबर हो जाएगी और किसान आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे।
वैज्ञानिक समीक्षा:
इस खोज का विवरण 17 अक्टूबर को bioRxiv प्रीप्रिंट सर्वर पर प्रकाशित हुआ। विशेषज्ञ समीक्षा (पीयर रिव्यू) अभी लंबित है। इस प्रणाली के लागू होने से हाइब्रिड धान की खेती में लागत कम होगी, उत्पादन अधिक होगा और किसानों को हर साल नए बीज खरीदने की बाध्यता खत्म होगी।