
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका सबसे खतरनाक उदाहरण हाल ही में सामने आए वीडियो हैं। इन वीडियो में देखा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और तहरीक-ए-तालिबान (TTP) बच्चों को अल्लाह के नाम पर आतंकवादी बनने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
पहले वीडियो में JeM के एक ट्रेनिंग कैंप को दिखाया गया है। वीडियो में एक मुख्य आतंकी बच्चों के सामने खड़ा है और उन्हें हथियार उठाकर, सीने पर ग्रेनेड बांधकर, ‘शौक-ए-शहादत’ की भावना के साथ अपने दुश्मनों को मारने की ट्रेनिंग देता है। बैकग्राउंड में जोरदार आवाज़ में बच्चों को उकसाया जा रहा है कि “जब अल्लाह के नाम पर बम फटता है, तब जमीन कांपती है और आसमान झूम उठता है।” वीडियो में मौजूद दर्जनों किशोर फोटो खिंचवा रहे हैं और आतंक फैलाने की कसम खा रहे हैं।
दूसरे वीडियो में TTP का प्रशिक्षण दिखाया गया है। TTP पाकिस्तान में कट्टर इस्लामिक शासन लागू करना चाहता है और इसके लिए सरकार और सेना से लड़ाई लड़ रहा है। वीडियो में बच्चे टीटीपी का झंडा हाथ में लेकर जश्न मनाते दिख रहे हैं, जबकि पीछे सशस्त्र आतंकवादी उनके साथ मार्च कर रहे हैं। JeM और TTP का उद्देश्य अलग हो सकता है – JeM भारत पर हमला करता है, जबकि TTP पाकिस्तान में ही हिंसा फैलाता है – लेकिन दोनों की विचारधारा समान रूप से कट्टर और खतरनाक है।
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, साल 2025 में पाकिस्तान में 699 आतंकी घटनाएं हुईं, जो 2024 की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कंफ्लीक्ट एंड सिक्योरी स्टडीज की रिपोर्ट में 2025 में कुल 1063 आतंकी घटनाओं की बात कही गई है। इन हमलों में 1034 लोग मारे गए, जिनमें आम नागरिक, पुलिस और सेना के जवान शामिल हैं। 437 सुरक्षाकर्मी आतंकवाद का शिकार हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वीडियो पाकिस्तान के समाज में आतंकवाद की बढ़ती स्वीकार्यता और कट्टरपंथ की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। जहां बच्चों को पढ़ाई और विज्ञान की शिक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां उन्हें बम बनाने और खुद को विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।