सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद भी विवाद जारी, अरावली की सुरक्षा पर एक्टिविस्ट की चिंता
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत रेंज की नई परिभाषा पर रोक लगा दी है। अब 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जाएगा। यह निर्णय पर्यावरण एक्टिविस्ट और स्थानीय समुदायों के लिए राहत भरा है, लेकिन उनका मानना है कि अरावली के पूर्ण संरक्षण के बिना विवाद खत्म नहीं होगा।
नीलम अहलूवालिया का इंटरव्यू:
अरावली विरासत जन अभियान और पीपल फॉर अरावली की फाउंडर मेंबर नीलम अहलूवालिया ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन एक्सपर्ट कमेटी तय करेगी कि कौन सी पहाड़ियां अरावली का हिस्सा हैं। हमें अरावली को परिभाषित करने की जरूरत नहीं, बल्कि इसके पूर्ण संरक्षण और बचाव की जरूरत है।"
नीलम ने कहा कि पिछले कई दशकों में अरावली खनन और रियल एस्टेट गतिविधियों के कारण भारी नुकसान झेल चुकी है। "अवधारणाओं और नियमों के बावजूद कई कम ऊंचाई वाली पहाड़ियां कानूनी संरक्ष...










