Tuesday, July 14

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“जीवन में एक लक्ष्य तय करें और प्रतिदिन उसकी ओर कदम बढ़ाएं”

विशेष साक्षात्कार

मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) से सम्मानित प्रोफेसर से विशेष बातचीत

प्रश्न: सर्वप्रथम आपको मानद डॉक्टरेट की प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई। जब आपको इस सम्मान की जानकारी मिली, तब आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

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उत्तर: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करके मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गर्व का अनुभव हुआ।


प्रश्न: आपके विचार में यह सम्मान आपके शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान को किस प्रकार प्रतिबिंबित करता है?

उत्तर: मुझे ऐसा महसूस हुआ कि वर्षों की मेरी मेहनत और समर्पण को इस सम्मान के माध्यम से उचित पहचान और सम्मान मिला है।


प्रश्न: इस उपलब्धि का श्रेय आप किसे देना चाहेंगे?

उत्तर: मैं इस उपलब्धि का श्रेय उन सभी लोगों को देना चाहता हूँ जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मेरी इस यात्रा में मेरा सहयोग और मार्गदर्शन किया।


शिक्षा एवं करियर

प्रश्न: आपकी शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत कैसे हुई और शिक्षा के क्षेत्र को ही अपने करियर के रूप में चुनने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

उत्तर: मेरी शैक्षणिक यात्रा एक निजी शिक्षक (Private Tutor) के रूप में शुरू हुई। उसी दौरान मुझे एहसास हुआ कि शिक्षा के माध्यम से मैं अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता हूँ।


प्रश्न: अपने शिक्षण जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि आप किसे मानते हैं?

उत्तर: विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) के रूप में अध्यापन करने की पात्रता प्राप्त करना मेरे शिक्षण जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।


प्रश्न: विद्यार्थियों को पढ़ाते समय आपका सबसे मूल्यवान अनुभव क्या रहा और आपने उनसे क्या सीखा?

उत्तर: सबसे सुखद अनुभव तब होता है जब विद्यार्थी बताते हैं कि प्रतिष्ठित कंपनियों के इंटरव्यू में वही प्रश्न पूछे गए जिन्हें मैंने कक्षा में पढ़ाया था। यह एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ा संतोष होता है।


मानद डॉक्टरेट का महत्व

प्रश्न: व्यक्तिगत रूप से मानद डॉक्टरेट आपके लिए क्या मायने रखती है?

उत्तर: यह सम्मान मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे समाज में मेरे प्रति सम्मान और विश्वास कई गुना बढ़ा है।


प्रश्न: क्या आपको लगता है कि ऐसे सम्मान शिक्षा, शोध और समाजसेवा के प्रति लोगों को प्रेरित करते हैं?

उत्तर: निश्चित रूप से। ऐसे सम्मान लोगों को समाज की सेवा अधिक ईमानदारी और समर्पण के साथ करने के लिए प्रेरित करते हैं।


प्रश्न: इस सम्मान के बाद आपकी जिम्मेदारियों में किस प्रकार की वृद्धि हुई है?

उत्तर: इस सम्मान के बाद मेरी जिम्मेदारियाँ निश्चित रूप से बढ़ गई हैं। अब मैं भविष्य में हर निर्णय और अधिक सोच-समझकर लेने का प्रयास करूँगा।


शोध एवं सामाजिक योगदान

प्रश्न: वर्तमान समय में उच्च शिक्षा और शोध के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

उत्तर: आज उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों की कमी है।


प्रश्न: युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए आपका क्या संदेश है?

उत्तर: मेरा संदेश है कि जीवन में एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और प्रतिदिन उस लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य करें।


प्रश्न: शिक्षा जगत और समाज के बीच बेहतर समन्वय कैसे स्थापित किया जा सकता है?

उत्तर: शिक्षा को अधिक व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को वही विषय पढ़ाए जाएँ जिनका वास्तविक जीवन में उपयोग हो सके।


भविष्य की योजनाएँ

प्रश्न: इस प्रतिष्ठित सम्मान के बाद आपकी प्राथमिकताएँ क्या रहेंगी?

उत्तर: मेरी प्राथमिकता रहेगी कि मैं अधिक से अधिक लोगों को उनके जीवन के लक्ष्य प्राप्त करने में सहयोग कर सकूँ।


प्रश्न: क्या वर्तमान में आप किसी नए शोध, पुस्तक या सामाजिक पहल पर कार्य कर रहे हैं?

उत्तर: इन दिनों मैं जैन धर्म की शिक्षाओं और धार्मिक आचरण को अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाने पर कार्य कर रहा हूँ।


प्रश्न: शिक्षा व्यवस्था में आप कौन-से सुधार देखना चाहते हैं?

उत्तर: मेरा मानना है कि शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिसमें विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार अर्जित करने में भी सक्षम बनें।


युवाओं के लिए संदेश

प्रश्न: आज के युवाओं को सफलता प्राप्त करने के लिए किन मूल्यों को अपनाना चाहिए?

उत्तर: युवाओं को शॉर्टकट से बचना चाहिए और ऐसा कार्य चुनना चाहिए जिसे वे वर्षों तक पूरी लगन और उत्साह के साथ कर सकें।


प्रश्न: क्या केवल डिग्रियाँ पर्याप्त हैं या कौशल और चरित्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर: डिग्रियाँ रोजगार प्राप्त करने में सहायक होती हैं, लेकिन उस क्षेत्र में लंबे समय तक सफल बने रहने के लिए कौशल और अच्छा चरित्र अत्यंत आवश्यक है।


प्रश्न: आपके अनुसार सफलता और असफलता की परिभाषा क्या है?

उत्तर: मेरे लिए सफलता का अर्थ है जीवन में संतोष और प्रसन्नता, जबकि असफलता दुःख और निराशा का प्रतीक है।


व्यक्तिगत जीवन

प्रश्न: आप अपने व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन कैसे बनाए रखते हैं?

उत्तर: मैं जिस भी कार्य को करता हूँ, उसमें शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः उपस्थित रहने का प्रयास करता हूँ।


प्रश्न: क्या कोई ऐसा अनुभव है जिसने आपके जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बदल दिया?

उत्तर: एलन मस्क को बार-बार असफलताओं से उभरकर सफलता प्राप्त करते हुए देखकर मेरे जीवन के प्रति सोच और दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया।


समापन

प्रश्न: यदि आपको देश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार लागू करने का अवसर मिले, तो आप क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?

उत्तर: मेरा प्रयास होगा कि प्रत्येक विषय को विद्यार्थियों को ब्लूम्स टैक्सोनॉमी (Bloom’s Taxonomy) के “Apply Level” तक व्यावहारिक रूप से सिखाया जाए।


प्रश्न: आपके जीवन का मूल मंत्र क्या है?

उत्तर: अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर परिश्रम करते रहना।


प्रश्न: अंत में अपने विद्यार्थियों, शुभचिंतकों और देश के युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है?

उत्तर: प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और प्रतिदिन उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ईमानदारी एवं निरंतरता के साथ प्रयास करते रहना चाहिए। यही सफलता का वास्तविक मार्ग है।

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