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जलियांवाला बाग हत्याकांड पर NCERT का नया सच: पहली बार शामिल हुई ‘माफी’ वाली जानकारी

नई दिल्ली, 24 फरवरी 2026: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने क्लास 8 की नई सोशल साइंस की किताब में जलियांवाला बाग हत्याकांड पर नया अपडेट दिया है। नई किताब में पहली बार उल्लेख किया गया है कि ब्रिटिश सरकार से माफी की रिक्वेस्ट की गई थी, लेकिन आज तक कोई माफी नहीं दी गई।

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जलियांवाला बाग हत्याकांड का विवरण

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैसाखी मेले में शामिल हजारों निहत्थी भारतीयों को जनरल डायर ने अपने सैनिकों के साथ घेरकर गोलियों से छलनी कर दिया। इसमें महिलाएँ, बच्चे और बूढ़े भी शामिल थे। दीवारों पर आज भी गोलियों के निशान मौजूद हैं।

NCERT की नई किताब में स्पष्ट किया गया है कि यह नरसंहार ब्रिटिश इतिहास की एक शर्मनाक घटना के रूप में दर्ज है। लेकिन अब पहली बार पाठ्यपुस्तक में यह भी उल्लेख है कि कई बार रिक्वेस्ट के बावजूद ब्रिटिश सरकार ने इसके लिए माफी नहीं मांगी

जनरल डायर को कोई सजा नहीं मिली

इस गोलीकांड के दोषी जनरल डायर को कोई कानूनी या कठोर सजा नहीं दी गई। ब्रिटिश सरकार ने उनके कार्यों को “Inhuman” और “Un-British” करार दिया, लेकिन न्यायिक कार्रवाई नहीं हुई। 1920 में बनाई गई हंटर कमीशन रिपोर्ट ने केवल डायर की निंदा की और सरकारी आंकड़ों के अनुसार वहां 379 मौतें हुईं। असल में हजारों लोगों की जान गई थी।

पार्टीशन पर नई किताब की व्याख्या

NCERT की नई किताब में भारत के विभाजन (Partition) पर भी विस्तृत जानकारी दी गई है। किताब बताती है कि महात्मा गांधी और अधिकांश कांग्रेस नेताओं ने विभाजन का विरोध किया, लेकिन अंततः इसे अनिवार्य रास्ता माना गया। नई किताब यह भी बताती है कि विभाजन के पीछे सिर्फ राजनीतिक निर्णय नहीं थे, बल्कि आम जनता के विद्रोह, क्रांतिकारियों की कोशिशें, और ब्रिटेन की कम होती शक्ति भी शामिल थी।

नई किताब का महत्व

NCERT की यह नई पाठ्यपुस्तक नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के अनुरूप तैयार की गई है। इसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम, जलियांवाला बाग और पार्टीशन के लेखकीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को अपडेट किया गया है।

यह बदलाव छात्रों और इतिहास में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी और नए दृष्टिकोण पेश करता है, जिसे पहले की किताबों में शामिल नहीं किया गया था।

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