Friday, May 29

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गाजियाबाद में डॉग बाइट का खतरा बढ़ा: चार महीनों में 4829 लोग शिकार, 40% बच्चे और बुजुर्ग

गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। एमएमजी अस्पताल के ताजा आंकड़ों के अनुसार सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच जिले में कुल 4829 लोग डॉग बाइट का शिकार हुए। इनमें 2896 मामले स्ट्रीट डॉग और 1933 मामले पालतू कुत्तों के काटने के हैं।

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बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा

अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि 40 प्रतिशत मामलों में बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। अधिकतर घटनाएं पार्क में खेलते समय, लिफ्ट में अचानक संपर्क या टहलते समय हुईं। कॉलोनियों में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में दहशत का माहौल है, खासकर उन इलाकों में जहां स्ट्रीट डॉग की संख्या अधिक है।

वैक्सीनेशन में बढ़ी भागीदारी

बढ़ते डॉग बाइट मामलों के बीच एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। दिसंबर में 5593 लोगों को टीका लगाया गया, जबकि नवंबर में 5056, अक्टूबर में 4575 और सितंबर में 3438 लोगों ने टीकाकरण कराया। सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

सबसे अधिक मामले पॉश और घनी आबादी वाले इलाकों से

गाजियाबाद के गोविंदपुरम, कविनगर, शास्त्री नगर, इंदिरापुरम, राजनगर एक्सटेंशन, वैशाली, वसुंधरा, प्रताप विहार, पंचवटी कॉलोनी, क्रॉसिंग रिपब्लिक और नंदग्राम जैसे इलाकों में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। इन क्षेत्रों में पालतू कुत्तों की संख्या अधिक है और ज्यादातर घटनाएं कुत्ते को खाना खिलाते समय, पप्पी के साथ खेलते हुए या टहलाने के दौरान हुईं।

मौसम के साथ बढ़ती है आक्रामकता

एमएमजी अस्पताल के डॉक्टर नितिन के अनुसार, सर्दियों (सितंबर–दिसंबर) और गर्मियों (मई–जुलाई) के महीनों में डॉग बाइट के मामलों में वृद्धि होती है। इसका कारण पालतू पशुओं के शरीर का अंदरूनी तापमान और बाहरी मौसम के बीच अंतर है, जो उन्हें अधिक आक्रामक बना देता है।

सुरक्षा और वैक्सीनेशन पर जोर

पालतू पशु का रजिस्ट्रेशन कराना और समय पर वैक्सीनेशन कराना मालिक की जिम्मेदारी है। रमतेराम रोड और पसौंडा स्थित सरकारी पशु चिकित्सालयों में वैक्सीनेशन की सुविधा उपलब्ध है।

नागरिकों से अपील

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि पालतू कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर हमेशा पट्टा लगाकर ले जाएं और समय पर रैबीज का टीकाकरण कराएं। विशेषज्ञों के अनुसार रैबीज एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और वैक्सीनेशन से इसे रोका जा सकता है।

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