Friday, May 29

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बीमा एजेंट बनना छोड़ें, बैंकिंग पर फोकस करें: वित्त मंत्री का स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बैंकों को कड़ा संदेश दिया कि वे ग्राहकों को गुमराह करके बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने जैसी मिस-सेलिंग की प्रवृत्तियों से बाज आएं। उन्होंने कहा कि बैंकों का मुख्य काम जमा जुटाना और कर्ज देना है, और उन्हें इसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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सीतारमण ने बताया कि कई बार ग्राहकों के पास पहले से बीमा होता है, फिर भी बैंक उनसे नए बीमा उत्पाद खरीदने को कहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई ने इसे केवल IRDAI के दायरे का मामला समझ कर नजरअंदाज किया, जबकि IRDAI मानती रही कि बैंक आरबीआई के नियंत्रण में हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, “ग्राहक पूछता है कि उसे बीमा लेने को क्यों कहा जा रहा है, जब वह होम लोन लेने के लिए अपनी प्रॉपर्टी गिरवी दे रहा है। मुझे खुशी है कि आरबीआई अब मिस-सेलिंग पर गाइडेंस ला रहा है। बैंकों को यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि वे मिस-सेलिंग नहीं कर सकते।”

मिस-सेलिंग पर नए ड्राफ्ट नियम

11 फरवरी को आरबीआई ने मिस-सेलिंग (गलत तरीके से उत्पाद बेचना) पर नए ड्राफ्ट नियम जारी किए। इसके तहत यदि कोई बैंक किसी ग्राहक को गलत तरीके से उत्पाद या सेवा बेचता है, तो ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा और नुकसान की भरपाई करनी होगी। ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।

सीतारमण ने फटकार लगाते हुए कहा कि बैंक बीमा बेचने में ज्यादा समय दे रहे हैं और अपने मुख्य काम में कम। उन्होंने बैंकों को सुझाव दिया कि वे सेविंग्स और करंट अकाउंट डिपॉजिट बढ़ाने पर ध्यान दें।

सोने के बढ़ते भाव पर नजर

वित्त मंत्री ने कहा कि सोने के बढ़ते भाव पर सरकार और आरबीआई की निगरानी है, लेकिन अभी चिंता की स्थिति नहीं है। इसका मुख्य कारण है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। सीतारमण ने बताया कि त्योहारों में भारत में सोने की मांग बढ़ जाती है, और अन्य देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना-चांदी खरीद रहे हैं।

“बैंकों को यह साफ संदेश मिलना चाहिए कि वे ग्राहकों को अब गुमराह नहीं कर सकते। मिस-सेलिंग सिर्फ डिक्शनरी का हिस्सा नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस पर एक्शन भी होना चाहिए।”
— निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री

PSU बैंकों के विलय पर स्थिति

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास पब्लिक सेक्टर बैंकों के विलय का फिलहाल कोई रोडमैप या योजना नहीं है। हालांकि, बजट 2026-27 में प्रस्तावित उच्च-स्तरीय समिति इस विषय और अन्य पहलुओं पर विचार करेगी।

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