Tuesday, February 24

ईरान–अमेरिका तनाव: होर्मुज पर साया, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली, 24 फरवरी 2026। पश्चिम एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक हलचल तेज है। Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद करने के संकेत दिए हैं। यह वही समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की ढुलाई होती है।

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ऐसे में ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर भारत के लिए यह संकेत चिंता बढ़ाने वाले हैं।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है—जो औसतन 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन है।

इनमें से 40 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति पश्चिम एशिया—विशेषकर Saudi Arabia, Iraq, United Arab Emirates, Kuwait, Qatar और Oman—से आती है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है।

यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो आपूर्ति श्रृंखला और कीमत—दोनों पर असर पड़ना तय है।

क्या हैं भारत के विकल्प?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यदि होर्मुज मार्ग आंशिक या पूर्ण रूप से बंद होता है, तो भारत वैकल्पिक पाइपलाइन मार्गों के जरिए आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा:

  • हबशान–फुजैराह पाइपलाइन (360 किमी) – जिसे Abu Dhabi National Oil Company संचालित करती है; क्षमता लगभग 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन।

  • ईस्ट–वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन (1,200 किमी) – जिसे Saudi Aramco नियंत्रित करता है; क्षमता लगभग 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन।

ये पाइपलाइन लाल सागर के रास्ते तेल निर्यात का विकल्प देती हैं, जिससे होर्मुज पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकती है।

रणनीतिक भंडार: कितनी है तैयारी?

भारत ने बीते वर्षों में अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाई है। पिछले तीन वर्षों में लगभग एक-तिहाई आयात Russia से हुआ, हालांकि हाल में इसकी हिस्सेदारी में कमी आई है।

इस महीने सऊदी अरब से आयात छह वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंचा है। अधिकारियों के अनुसार, देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) लगभग 74 दिनों की जरूरत पूरी करने में सक्षम हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, “मुख्य चिंता आपूर्ति की उपलब्धता नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में कीमतों में संभावित उछाल है।”

कितना बढ़ सकता है आयात बिल?

रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो भारत का वार्षिक आयात बिल 13–14 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या सचमुच बंद होगा होर्मुज?

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पूर्ण बंद होना आसान नहीं है। यह मार्ग न केवल वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए, बल्कि खाड़ी देशों और अमेरिका—दोनों के आर्थिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

फिर भी, मौजूदा तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश को आपूर्ति स्रोतों के और अधिक विविधीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और रणनीतिक भंडार सुदृढ़ीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे।

निष्कर्ष:
ईरान–अमेरिका टकराव की आशंका ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक भू-राजनीति का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। फिलहाल नई दिल्ली सतर्क है—और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हर संभावित विकल्प पर विचार कर रही है।

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