Saturday, February 21

झारखंड में SIR को लेकर सियासी संग्राम: वोटर लिस्ट पर हड़कंप

रांची: झारखंड में एसआईआर (मतदाता पुनरीक्षण) को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। विधानसभा और सरकारी कार्यालयों में प्रक्रिया को लेकर हलचल बढ़ गई है, और नेताओं व अफसरों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हो रही है।

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मरांडी का बयान: वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण है उद्देश्य

विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एसआईआर देश में हर 10 साल में होता रहा है और झारखंड में भी इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाता सूची का शुद्धिकरण है।

  • जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम हटेंगे।

  • जो लोग राज्य से बाहर चले गए हैं, उनका नाम कटेगा।

  • जो अवैध तरीके से मतदाता बने हैं, उनका नाम हटेगा।

मरांडी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का विरोध इस बात के लिए है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों और अवैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटें। उनका कहना था कि एसआईआर चुनाव आयोग का काम है और इसे सफलतापूर्वक लागू करना सभी का दायित्व है।

कांग्रेस और झामुमो का विरोध

वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि वे मतदाता पुनरीक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके दुरुपयोग का घोर विरोध करते हैं। उनका आरोप है कि इससे लोगों के मताधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने इसे भाजपा की रणनीति करार देते हुए कहा कि इससे विशेष रूप से आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और ईसाइयों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि इसका मकसद भाजपा विरोधी मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाकर उनकी संख्या घटाना है।

देश के 22 राज्यों में एसआईआर

जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि एसआईआर में संदेह करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना कर रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में जिनका नाम गलत तरीके से है, वह हटेगा।

चुनाव आयोग की ओर से अब तक 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराया जा चुका है। अगला राउंड आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, एनसीटी दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड में होगा।

चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को एसआईआर से जुड़ी सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

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