Saturday, February 21

चिराग पासवान ने कहा: मेरी मां राज्यसभा कैंडिडेट नहीं हैं, NDA की पांचवीं सीट की लड़ाई अब खींचतान का केंद्र

पटना: बिहार में मार्च 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गलियारे गर्म हैं। बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट को लेकर सियासी समीकरण लगातार बदल रहे हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने साफ कर दिया कि उनकी मां रीना पासवान राज्यसभा चुनाव की कैंडिडेट नहीं होंगी।

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चिराग ने पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी मां सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं लेंगी और राज्यसभा में कोई दावेदारी नहीं बनाएंगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं कहा कि उनकी पार्टी से कोई अन्य उम्मीदवार नहीं होगा।

राज्यसभा की पांचवीं सीट पर क्या चल रहा है?

बिहार में राज्यसभा के लिए दो-दो सीटें भाजपा और जदयू के खाते में तय हैं। पांचवीं सीट को लेकर लोजपा (रामविलास) और अन्य छोटे दलों के बीच गणित और गठबंधन को लेकर जद्दोजहद जारी है।

लोजपा (आर) के पास कुल 19 विधायक हैं और एनडीए के शेष विधायकों के समर्थन से केवल तीन विधायकों की जरूरत पड़ेगी। वहीं, रालोमो और हम जैसे अन्य छोटे दलों के पास भी कुछ विधायक हैं, जिनकी संख्या जीत के समीकरण में महत्वपूर्ण हो सकती है।

राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि एआईएमआईएम के विधायक भी लोजपा (आर) के उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं। इस तरह पांचवीं सीट की लड़ाई में एनडीए के भीतर रणनीति और गठबंधन समीकरण अहम भूमिका निभा रहे हैं।

चिराग पासवान की स्थिति

चिराग पासवान ने राज्यसभा की पांचवीं सीट पर अपनी मां को नहीं भेजने का स्पष्ट संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार से कोई राज्यसभा नहीं जाएगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे भाजपा पर दबाव बनाने की स्थिति में नहीं हैं।

लोजपा (आर) को पांचवीं सीट का हक मिलता है, लेकिन एनडीए के भीतर सीट की लड़ाई और बीजपी की रणनीति के अनुसार तीसरी सीट पर स्वयं उम्मीदवार खड़ा कर सकती है। राजनीतिक हलकों में यह अनुमान है कि भाजपा राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए यह रणनीति अपना रही है।

भविष्य का समीकरण

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि पांचवीं सीट पर लोजपा (आर) को एमएलसी या मंत्री पद देकर एडजस्ट किया जा सकता है, जबकि रालोमो और हम अपने दावेदारों को संतुष्ट करने का प्रयास करेंगे। भाजपा इस सीट पर सीधे चुनाव लड़कर गठबंधन के भीतर कलह से बचना चाहती है।

राज्यसभा चुनाव 2026 में बिहार की यह पांचवीं सीट राजनीतिक समीकरण और गठबंधन रणनीति का प्रमुख केंद्र बन गई है।

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