Saturday, February 21

‘वंदे मातरम विवाद पर अनु कपूर का खुला बयान: अगर लगता है ये प्रार्थना हिंदू की है तो आपको प्रॉब्लम क्या?’

मुंबई। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर उठ रहे विवादों के बीच बॉलीवुड के अनुभवी अभिनेता और होस्ट अनु कपूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार के नए दिशा-निर्देशों का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक शानदार फैसला है और वे पिछले 32 वर्षों से इस विषय पर इसी तरह की बात कह रहे हैं।

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अनु कपूर ने कहा – निर्णय है कमाल का

अनु कपूर ने कहा, “बहुत अच्छा निर्णय लिया गया। आज से सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और आधिकारिक आयोजनों में वंदे मातरम के सभी 6 अंतरे गाना अनिवार्य किया गया है। मैं 32 सालों से इस पर बोल रहा हूं।” उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने 32 साल पहले दुबई में शूटिंग के दौरान वंदे मातरम का उद्घोष किया, तब कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी। मैंने कहा कि मैं तो हरि ओम नाद ही कर सकता हूं, मैं वंदे मातरम कह कर ही मरूंगा। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।”

वंदे मातरम और धार्मिक भावनाएं

अनु कपूर ने वंदे मातरम के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “स्वर्गीय पंडित बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय की यह अमर रचना हमारे राष्ट्रगीत के रूप में है। अगर इसे हिंदू प्रार्थना कहा जाए, तो इसमें समस्या क्या है? संस्कृत भाषा में लिखी यह प्रार्थना समस्त विश्व के कल्याण की कामना करती है, न कि केवल किसी एक धर्म के लिए। हमारे धर्म का दर्शन हमें अहिंसा और शांति का संदेश देता है।”

उन्होंने आगे कहा, “संस्कृत में लिखा साहित्य, वेद-पुराण, महाभारत, रामायण सभी धर्म और संस्कृति का हिस्सा हैं। जब हम वंदे मातरम गाते हैं, तो यह केवल राष्ट्र और मानवता की भलाई के लिए है।”

नए सरकारी दिशा-निर्देश

केंद्र सरकार ने हाल ही में वंदे मातरम के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • अब सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में सिर्फ दो छंद नहीं, बल्कि पूरे 6 छंद गाए जाएंगे

  • राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले वंदे मातरम प्रस्तुत किया जाएगा।

  • वंदे मातरम के दौरान सभी उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।

  • सिनेमा हॉल को इस नियम से बाहर रखा गया है।

  • पूरे 6 छंदों के गायन की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है।

आलोचना और विवाद

कुछ मुस्लिम नेताओं और आलोचकों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि गीत के बाद के छंदों में धार्मिक प्रतीकवाद है, जो धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक सिद्धांतों के विरोध में है। एआईएमआईएम (AIMIM) सहित कई मुस्लिम नेताओं ने कहा कि इसे थोपने से राष्ट्रीय एकता को नुकसान हो सकता है।

अनु कपूर ने इस पर जवाब दिया, “समय बदल सकता है, लेकिन हमारी संस्कृति और धर्म का संदेश हमेशा शांति और अहिंसा का है। हमें इसे सही भाव से अपनाना चाहिए।”

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