
नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ आदेश को पलट दिया है। ट्रंप ने इसे लागू करने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA), 1977 का इस्तेमाल किया था, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
IEEPA क्या है?
IEEPA 1977 में लागू हुआ कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान विदेशी खतरों से निपटने के लिए आर्थिक लेनदेन नियंत्रित करने का अधिकार देता है। यह कानून इंपोर्ट, एक्सपोर्ट और वित्तीय लेनदेन को नियंत्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें विशेष रूप से टैरिफ का उल्लेख नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप पहले राष्ट्रपति बने जिन्होंने वैश्विक टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का इस्तेमाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।
IEEPA का उपयोग इन 5 क्षेत्रों में होता है
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आर्थिक फैसले तुरंत प्रभाव से लागू करने में
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इंपोर्ट और एक्सपोर्ट पर बैन लगाने में
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विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करने में
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डॉलर ट्रांजेक्शन और बैंकिंग को नियंत्रित करने में
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विदेशी निवेश पर नियंत्रण करने में
IEEPA का इतिहास
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1977 के लागू होने के बाद यह कानून 82 बार अलग-अलग राष्ट्रीय आपात स्थितियों में इस्तेमाल हुआ।
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अमेरिका में घोषित लगभग 90% राष्ट्रीय आपातकाल इसी कानून के तहत आते हैं।
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पहली बार 1979 में राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ईरानी बंधक संकट के दौरान इसका उपयोग किया।
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ट्रंप ने अपने कार्यकाल में 22 राष्ट्रीय आपातकालों में IEEPA का अधिकतम इस्तेमाल किया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 बहुमत से कहा कि ट्रंप के पास IEEPA के तहत वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि IEEPA राष्ट्रपति को आपातकाल के दौरान आयात नियंत्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं। टैरिफ लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है।
