
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दो महीने शेष हैं और राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामकृष्ण परमहंस जयंती पर की गई पोस्ट को लेकर तीखा आरोप लगाया है।
पीएम पर सांस्कृतिक असंवेदनशीलता का आरोप
पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा था,
“स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी को उनकी जन्म-जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने अध्यात्म और साधना को जिस प्रकार जीवनशक्ति के रूप में स्थापित किया, वह हर युग में मानवता का कल्याण करता रहेगा। उनके सुविचार और संदेश सदैव प्रेरणापुंज बने रहेंगे।”
ममता बनर्जी ने इसे रीपोस्ट करते हुए कहा,
“हैरान हूं! एक बार फिर हमारे प्रधानमंत्री ने बंगाल की महान हस्तियों के प्रति अपनी सांस्कृतिक असंवेदनशीलता का आक्रामक प्रदर्शन किया है। आज युगावतार श्री श्री रामकृष्ण परमहंसदेव की जन्मतिथि है। इस अवसर पर महान संत को श्रद्धांजलि अर्पित करने के प्रयास में, हमारे प्रधानमंत्री ने उनके नाम के आगे ‘स्वामी’ जैसा अभूतपूर्व और अनुचित उपसर्ग जोड़ दिया।”
रामकृष्ण परमहंस स्वामी नहीं
सीएम ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि रामकृष्ण परमहंस को व्यापक रूप से ठाकुर के रूप में पूजा जाता था। उनके तपस्वी शिष्यों ने उनके निधन के बाद रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, और शिष्यों के लिए ‘स्वामी’ उपसर्ग प्रयुक्त किया गया। लेकिन स्वयं रामकृष्ण परमहंस को गुरु, आचार्य या ठाकुर के नाम से ही जाना गया। स्वामी उपसर्ग केवल उनके शिष्यों, जैसे स्वामी विवेकानंद, के लिए था।
ममता का प्रधानमंत्री से अनुरोध
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से विनम्र निवेदन किया कि वे आधुनिक भारत को आकार देने वाले बंगाल के महान पुनर्जागरणकालीन व्यक्तित्वों के लिए नए उपसर्ग या प्रत्यय न खोजें और उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें।
