
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा संस की कमान एक बार फिर एन चंद्रशेखरन को सौंपी जा सकती है। टाटा संस अगले हफ्ते ईजीएम (Extraordinary General Meeting) की तैयारी कर रही है, जिसमें उनके तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा जा सकता है।
रिटायरमेंट पॉलिसी में अपवाद
चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल अभी खत्म होने में एक साल बाकी है। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो उन्हें टाटा संस की 65 साल की उम्र पर लागू होने वाली नॉन-एग्जीक्यूटिव रिटायरमेंट पॉलिसी में छूट दी जाएगी। यह छूट 2016 में रतन टाटा को भी दी गई थी, जब उन्होंने साइरस मिस्त्री की जगह चेयरमैन का पद संभाला था। जून में चंद्रशेखरन 63 साल के हो जाएंगे।
टाटा ट्रस्ट्स की हरी झंडी
पिछले साल अक्टूबर में टाटा ट्रस्ट्स, जो टाटा संस के मैज्योरिटी शेयरहोल्डर हैं, ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी। इसके अलावा, अगले हफ्ते टीसीएस का टॉप मैनेजमेंट टाटा संस के बोर्ड को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर प्रजेंटेशन देगा। हाल ही में AI के उभार और अमेरिका की कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा लॉन्च किए गए Claude Cowork टूल ने आईटी सर्विसेज कंपनियों के बिजनेस मॉडल को चुनौती दी है।
टाटा ग्रुप का प्रदर्शन
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एयर इंडिया में हुए अपडेट्स की जानकारी भी दी जाएगी। टाटा ग्रुप के लिए 2025 चुनौतीपूर्ण रहा। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 24% की बढ़त के साथ 5.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि नेट प्रॉफिट 17% घटकर 28,898 करोड़ रुपये रहा।
होल्डिंग कंपनी की टाटा ग्रुप की कंपनियों में हिस्सेदारी 8% से 71.75% तक है, और ग्रुप की इनकम में इन कंपनियों द्वारा दिए गए डिविडेंड का बड़ा योगदान है। वित्तीय वर्ष 2025 में टाटा ग्रुप का सभी लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों से कुल रेवेन्यू 15.34 लाख करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 1.13 लाख करोड़ रुपये रहा।
चंद्रशेखरन का सफर
एन चंद्रशेखरन को फरवरी 2022 में दूसरा टर्म दिया गया था। वह अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया। अब उनका तीसरा कार्यकाल मिलने की संभावना है, जो टाटा ग्रुप की रिटायरमेंट पॉलिसी में अपवाद बन जाएगा।
