
मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने नौसेना अधिकारियों को नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि क्या वे उस समय “सो रहे थे” जब दक्षिण मुंबई में नौसेना के प्रमुख अड्डे आईएनएस शिकरा के पास 23 मंजिला इमारत का निर्माण शुरू हुआ था। जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की बेंच ने नौसेना की याचिका की आंशिक सुनवाई के साथ शुक्रवार तक स्थगित कर दी, लेकिन नेवी अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई।
याचिका में नेवी अफसरों ने यह दावा किया कि जाधवजी मेंशन के निर्माण से संवेदनशील नौसैनिक प्रतिष्ठानों और वीवीआईपी हेलीपोर्ट के 500 मीटर के भीतर सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन हो रहा है और इसके पास नौसेना का एनओसी नहीं है। नेवी के वरिष्ठ वकील आर.वी. गोविलकर ने कोर्ट को बताया कि नौसेना ने 2025 के मध्य से इस मामले को उठाया, तब तक इमारत की 15वीं मंजिल बन चुकी थी।
बिल्डर ओपुल कंस्ट्रक्शंस के वकील जनक द्वारकादास ने तर्क दिया कि अनुमति मिलने के 15 वर्षों तक और बाद में निर्माण शुरू होने तक नौसेना क्यों कुछ नहीं कर रही थी। हाई कोर्ट ने भी नौसेना पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आप इस पूरे समय सो रहे थे?”
पीठ ने नौसेना की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अस्थायी रूप से 15 मंजिलों तक निर्माण की अनुमति दी, जबकि अंतिम आदेश तक ऊपरी मंजिलों पर निर्माण पर रोक रहेगी। जस्टिस रविंद्र घुगे ने कहा, “नौसेना को नियमित रूप से अपने प्रतिष्ठानों के आसपास निगरानी करनी चाहिए ताकि सुरक्षा से समझौता न हो।”
नौसेना ने जुलाई 2025 में बीएमसी को निर्माण रोकने का निर्देश दिया, लेकिन नगर निगम ने पूर्व स्वीकृतियों के हवाले से कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद जनवरी 2026 में ही बीएमसी ने ऊपरी मंजिलों की योजना साझा की। आईआईटी की रिपोर्ट के अनुसार इमारत की संभावित ऊंचाई 76 मीटर है।
