
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विधायकों के फोन न उठाने और उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बुधवार को विधानसभा में यह मामला जोर पकड़ गया, जब अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो उदाहरण प्रस्तुत करे। इसके साथ ही उन्होंने शासन स्तर पर स्पष्ट आदेश जारी करने और पहले से लागू निर्देशों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
सदन में बोलते हुए सतीश महाना ने कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के दायित्व और सीमाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तीनों संस्थाओं के अधिकार और कर्तव्य तय हैं और उनका मजबूती से पालन होना चाहिए। किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा या हस्तक्षेप लोकतंत्र को कमजोर करता है।
अध्यक्ष ने विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि केवल चुनाव को ध्यान में रखकर काम करने वाले राजनेता कहलाएंगे, लेकिन जो सदस्य भविष्य की पीढ़ियों के हित में कार्य करते हैं, वही सच्चे अर्थों में स्टेट्समैन होते हैं।
माना जा रहा है कि मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने सदन में यह मुद्दा उठाया था। उनका आरोप था कि कार्यपालिका विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही है। इस पर अध्यक्ष ने तुरंत व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया था और बुधवार को उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी कर अधिकारियों को चेतावनी दी।
