
राजस्थान के सुमलाई गांव से आने वाले देशल दान चरण की कहानी बताती है कि गरीबी, कठिनाई और संघर्ष भी सफलता की राह रोक नहीं सकते। देशल ने पहले IIT-JEE और फिर UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया।
पिता की मेहनत और बच्चों के लिए कर्ज
देशल के पिता कुशलदान चरण गांव में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। घर का खर्च निकालना मुश्किल था, फिर भी उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के लिए कई बार कर्ज लेकर निवेश किया। उनका मानना था कि बच्चों का भविष्य संवारना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
बड़े भाई का अचानक निधन और दृढ़ संकल्प
देशल 10वीं क्लास में थे जब उनके बड़े भाई की पनडुब्बी दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस सदमे के बावजूद परिवार को संभालते हुए देशल ने अपने IAS बनने के सपने को जीवन में उतारने की ठानी।
IIT-JEE और सिविल सेवा परीक्षा में सफलता
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12वीं के बाद देशल ने इंजीनियरिंग एंट्रेंस (JEE) की तैयारी की और पहली ही बार में सफलता पाई।
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IIT जबलपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद भी देशल ने अपने IAS बनने के सपने को अधूरा नहीं छोड़ा।
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2017 में उन्होंने पहली बार UPSC परीक्षा दी और 82वीं रैंक हासिल कर IAS अधिकारी बने।
देशल की कहानी यह सिखाती है कि लगन, संघर्ष और दृढ़ संकल्प से कोई भी सपना सच किया जा सकता है। पिता की मेहनत और परिवार का समर्थन उनके सफर का अहम हिस्सा था।
