Wednesday, February 18

भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कड़ा नियंत्रण संभव: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली: केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने India AI Impact Summit 2026 में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग को लेकर सरकार की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। मंत्री ने संकेत दिए कि आने वाले समय में बच्चों के लिए सोशल मीडिया और डीपफेक कंटेंट पर कड़े रेगुलेशन लागू किए जा सकते हैं।

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बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता

वैष्णव ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित करना आवश्यक है और कई देशों ने इसे मान्यता दी है कि उम्र के आधार पर कंटेंट और एक्सेस कंट्रोल जरूरी है। उन्होंने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें एड-बेस्ड कैटेगरी बनाई गई है, जो यह तय करती है कि कौन सा कंटेंट बच्चों तक पहुंच सकता है और कौन सा नहीं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्लोबल स्तर पर बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर चर्चा चल रही है और भारत भी इसके लिए कानूनी ढांचा तैयार कर रहा है। इंडस्ट्री के साथ बातचीत के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किस तरह के रेगुलेशन लागू होने चाहिए।

AI और टेक्नो-लीगल अप्रोच

वैष्णव ने कहा कि सरकार AI का UPI बनाने की दिशा में सोच रही है और नकारात्मक AI से निपटने के लिए टेक्नो-लीगल अप्रोच अपनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि AI सेफ्टी इंस्टिट्यूट के जरिए ऐसे समाधान विकसित किए जा रहे हैं, जो AI के नकारात्मक प्रभाव को कम करेंगे।

मंत्री ने AI को पांचवी औद्योगिक क्रांति करार देते हुए कहा कि इसके कारण हेल्थकेयर से लेकर एजुकेशन तक सेवाएं किफायती होंगी। आने वाले 2 वर्षों में IT क्षेत्र में $200 बिलियन से अधिक निवेश की उम्मीद जताई गई है।

कानूनी फ्रेमवर्क का पालन अनिवार्य

वैष्णव ने कहा कि नेटफ्लिक्स, मेटा और X जैसी कंपनियों को भारत के कानूनी फ्रेमवर्क और संविधान के दायरे में काम करना होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि संसदीय कमिटी ने इस संबंध में अध्ययन कर सुझाव दिए हैं और आगामी नियमों पर संसद में सहमति बनाई जाएगी।

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