
जिनेवा, 18 फरवरी 2026: अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को जिनेवा में दूसरे दौर की परमाणु वार्ता हुई, जिसने क्षेत्रीय शांति की उम्मीदें जगाई हैं। इस बैठक में ईरान और अमेरिका के बीच सीधे संवाद की बजाय ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था।
तीन घंटे की बातचीत, सकारात्मक माहौल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि यह बैठक करीब तीन घंटे चली और पहले दौर की तुलना में अधिक सकारात्मक और रचनात्मक रही। अराघची ने कहा कि बातचीत का फोकस केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर था और अन्य मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई।
अराघची ने ईरानी टेलीविजन को बताया, “जरूरी मुद्दों यानी ‘गाइडिंग प्रिंसिपल्स’ पर आम सहमति बन गई है। इन सिद्धांतों के आधार पर अब हम मसौदा तैयार करेंगे। इससे आगे बढ़ने का एक स्पष्ट और सकारात्मक रास्ता मिल गया है।”
आगे की प्रक्रिया
अराघची ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया एकदम से पूरी नहीं होगी, लेकिन वार्ता के अगले चरण के लिए स्पष्ट दिशा मिल गई है। संभावित समझौते के मसौदे पर काम करने के बाद तीसरे दौर की वार्ता की तारीख तय की जाएगी और उसका सार्वजनिक ऐलान किया जाएगा।
क्षेत्रीय तनाव के बीच वार्ता
इस वार्ता का आयोजन स्विट्जरलैंड के जिनेवा में ऐसे समय हुआ, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सैन्य अभ्यास के लिए कुछ समय के लिए बंद करने की घोषणा की है। इस दौरान अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है।
परमाणु हथियार पर ईरान का موقف
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने साफ़ किया कि उनका देश परमाणु बम नहीं बना रहा है और पश्चिमी देशों की इस मुद्दे पर चिंता गलत है। वहीं अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि वॉशिंगटन ईरान के साथ डिप्लोमेसी पर भरोसा करता है, लेकिन न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं।
इस वार्ता ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है और शांति की संभावनाओं को मजबूत किया है।
