
बांदा (उत्तर प्रदेश): मतदाता सूची सत्यापन (SIR ड्यूटी) के दौरान बांदा में तैनात महिला बीएलओ अनीता रावत को सोमवार को अचानक दिल का दौरा पड़ गया। गंभीर हालत के कारण उन्हें बांदा से ग्वालियर रेफर किया गया, जहां वह वर्तमान में ICU में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। परिजनों का आरोप है कि काम के भारी दबाव और मानसिक तनाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
बीएलओ और परिवार का दावा
अनीता रावत, सदर विधानसभा क्षेत्र के कहला गांव की रहने वाली, प्राथमिक विद्यालय गंछा में शिक्षामित्र के पद पर तैनात हैं। उनके देवर सुरेश रावत ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य के दौरान अनीता को लगातार मानसिक दबाव में रखा गया। विभागीय अधिकारियों ने टारगेट पूरा न होने के कारण उन्हें तीन बार कारण बताओ नोटिस थमाए और समीक्षा बैठकों में सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
सुरेश रावत के मुताबिक, अनीता ने अपनी खराब सेहत और काम के अत्यधिक दबाव का हवाला देते हुए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय (बीआरसी) में प्रार्थना पत्र भी दिया था। लेकिन आरोप है कि इस गुहार पर कोई राहत नहीं दी गई और उन्हें और अधिक दबाव में रखा गया।
प्रशासन का जवाब
दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। एसडीएम अमित शुक्ला ने कहा कि यदि बीएलओ की तबीयत खराब थी, तो उन्हें इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को देनी चाहिए थी। प्रशासन उनकी पूरी मदद करता।
बीएसए अव्यक्तराम तिवारी ने भी कहा कि बीमारी से जुड़े किसी भी प्रार्थना पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची सत्यापन का कार्य एक तय समय-सीमा में करना अनिवार्य है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर बीमारी की जानकारी दी जाती, तो अनीता को राहत दी जाती।
