
अक्सर घर बनने के कुछ समय बाद दीवारों या छतों पर दरारें आना आम समस्या बन जाती हैं। यह न सिर्फ घर की खूबसूरती को प्रभावित करता है, बल्कि सीलन और मजबूती की चिंता भी बढ़ा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये दरारें प्लास्टर के दौरान की गई छोटी-छोटी गलतियों का नतीजा होती हैं।
सीविल इंजीनियर ने प्लास्टर करते समय ध्यान रखने योग्य 6 अहम बातें बताईं, जिन्हें अपनाकर आप दीवारों और छतों में दरारों से बच सकते हैं और पेंट की फिनिशिंग भी बेहतरीन बना सकते हैं।
1. रेत की छनाई और क्वालिटी
प्लास्टर के लिए हमेशा बारीक और अच्छी तरह छानी हुई रेत का इस्तेमाल करें। मोटी रेत या अधिक मिट्टी वाली रेत दीवारों पर सूखने के बाद दरारें डाल सकती है।
2. फाइबर मैश या ‘मुर्गा जाली’ का उपयोग
ईंटों की दीवार और कंक्रीट कॉलम के ज्वाइंट्स पर फाइबर मैश या मुर्गा जाली लगाएं। यही नियम इलेक्ट्रिक पाइप फिटिंग वाले हिस्सों पर भी लागू होता है।
3. हैकिंग यानी टक लगाना जरूरी
कंक्रीट की चिकनी सतह पर प्लास्टर लगाने से पहले छोटे-छोटे छेद या टक लगाना आवश्यक है, ताकि सीमेंट का घोल अच्छी तरह चिपक सके।
4. पानी से तराई और सीमेंट का घोल
प्लास्टर लगाने से एक दिन पहले दीवार या छत को पानी से भिगोएं। काम वाले दिन भी सतह गीली रखें। इसके बाद गाढ़ा सीमेंट का घोल लगाएं, जो पुरानी दीवार और नए प्लास्टर के बीच मजबूत गोंद का काम करता है।
5. सीमेंट और रेत का सही अनुपात और मोटाई
सीमेंट और रेत का अनुपात 1:4 या 1:5 होना चाहिए। साथ ही, अंदरूनी दीवारों पर प्लास्टर की मोटाई 10 से 12 मिमी के बीच रखें। ज्यादा मोटा प्लास्टर फटने या गिरने का जोखिम बढ़ाता है।
6. फिनिशिंग और गैप पर ध्यान दें
प्लास्टर को पूरी दीवार पर एकसमान और बराबर लेवल में लगाएं। खाली जगह या गैप न छोड़ें। ऐसा करने से पुट्टी और पेंट की फिनिशिंग भी शानदार आएगी।
सिविल इंजीनियर के ये टिप्स अपनाकर आप अपने घर को भविष्य में दरारों और नुकसान से बचा सकते हैं और दीवारों की सुंदरता लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।
