
पटना (सुनील पाण्डेय) – बिहार विधान परिषद में एमएलसी आवास, आर-ब्लॉक के पास सुबह और देर रात सुनाई देने वाली डरावनी चीखों ने सदन में सनसनी मचा दी। कांग्रेस एमएलसी समीर कुमार सिंह ने विधानसभा में यह मामला उठाते हुए कहा कि ये आवाजें किसी अलौकिक घटना की तरह लगती हैं, लेकिन वास्तविकता में इसके पीछे सड़क हादसों और खराब निर्माण डीपीआर का हाथ है।
समीर सिंह के अनुसार, एमएलसी आवास और आसपास के क्षेत्र में हर दो-चार दिन में किसी न किसी सड़क दुर्घटना के कारण दिल दहला देने वाली चीखें सुनाई देती हैं। पास के पुल और सड़कों पर लगातार होने वाली भीषण हादसों ने इस इलाके को धीरे-धीरे ‘डेथ जोन’ बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले तैयार की गई बेहतर डीपीआर दरकिनार कर तीसरी डीपीआर को मंजूरी दी गई, जो अब हादसों का प्रमुख कारण बन रही है।
सड़क हादसों पर सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि विभाग हादसों को रोकने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पैदल यात्रियों के लिए फुट ओवर ब्रिज (FOB) बनवाए गए हैं, लेकिन लोग शॉर्टकट का उपयोग करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। इसके अलावा स्पीड ब्रेकर और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।
मंत्री ने विपक्ष से अपील की कि यदि उनके पास सड़क सुरक्षा सुधार के ठोस सुझाव हैं, तो उन्हें साझा करें। सरकार उन पर विचार कर सुधार करने के लिए तैयार है, ताकि कीमती जान और माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्या है सच?
हालांकि कुछ लोग इसे ‘भूतों का शोर’ मान रहे हैं, लेकिन विधायक और अधिकारियों के मुताबिक यह सड़क हादसों और लापरवाही का परिणाम है। यह मामला पटना में सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
