
अयोध्या, 16 फरवरी 2026: आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ND University) ने मंदिरों में बढ़ती रामदाना (राजगीरा) प्रसाद की मांग को देखते हुए इसकी उन्नत प्रजाति विकसित करने के लिए शोध कार्य शुरू किया है।
न्यूनतम संसाधन में अधिक उत्पादन
विश्वविद्यालय के पादप प्रजनन एवं अनुवांशिकी विभाग के वैज्ञानिक वर्ष 2028 तक उच्च उत्पादन क्षमता वाली नई किस्म विकसित करने का लक्ष्य लेकर कार्य कर रहे हैं। विभाग के प्रभारी एवं सह प्राध्यापक डॉ. विक्रमजीत सिंह के अनुसार, रामदाना एक ऐसी फसल है जिसे कम संसाधनों और सामान्य परिस्थितियों में आसानी से उगाया जा सकता है। मध्य भारत में इसका उपयोग फलाहार के रूप में व्यापक है।
उन्होंने बताया कि अयोध्या धाम के विकास और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रसादी उत्पादों में रामदाना की खपत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम बन सकता है।
180 जर्मप्लाज्म पर परीक्षण
डॉ. सिंह ने कहा कि अब तक रामदाना के 180 जर्मप्लाज्म (जनन-द्रव्य) एकत्रित किए जा चुके हैं। इन्हें विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र में पंक्तिवार बोकर परीक्षण किया जा रहा है। ये जर्मप्लाज्म देश के विभिन्न हिस्सों से संकलित किए गए हैं, जिनमें राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो और बेंगलुरु स्थित केंद्र से प्राप्त सामग्री भी शामिल है। प्रारंभिक अवलोकन में गुजरात, जोधपुर और बेंगलुरु की स्थानीय प्रजातियों का प्रदर्शन बेहतर पाया गया है।
2028 तक नई प्रजाति की उम्मीद
विश्वविद्यालय ने अब तक रामदाना की कोई अधिसूचित प्रजाति जारी नहीं की है। वर्तमान शोध का उद्देश्य उच्च उत्पादकता, बेहतर दाना गुणवत्ता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत किस्म विकसित करना है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वर्ष 2028 तक नई प्रजाति तैयार कर अधिसूचित की जा सकेगी।
