
जबलपुर। पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान अश्विन काछी के शहादत दिवस पर उनके परिजनों का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा। जबलपुर जिले के खुदावल गांव में शहीद अश्विन के परिवार ने श्रद्धांजलि स्वरूप कन्या भोज का आयोजन किया, लेकिन इस मौके पर कोई भी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी परिवार के बीच नहीं पहुंचा। परिवार ने आरोप लगाया कि जो नेता और अधिकारी शहीद के नाम पर बड़े-बड़े वादे करते थे, आज वे सब मुंह मोड़ चुके हैं।
हालांकि, इस मौके पर सीआरपीएफ के अधिकारी और जवान गांव पहुंचे और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित कर परिवार को ढांढस बंधाया।
भाई ने खुद के खर्च पर लगवाई शहीद की मूर्ति
शहीद अश्विन काछी के भाई सुमंत कुमार काछी ने बताया कि उन्होंने अपने भाई की याद में गांव के मैदान में 6 लाख रुपये खर्च कर मूर्ति स्थापित करवाई थी। मूर्ति के अनावरण के समय कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुंचे थे। उस दौरान शहीद के सम्मान में स्कूल खोलने और मूर्ति स्थल को पार्क में विकसित करने का आश्वासन दिया गया था।
लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह वादे केवल कागजों तक सीमित रह गए।
शहादत दिवस पर भी नहीं पहुंचा कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि
सुमंत ने दुख जताते हुए कहा कि शहादत दिवस जैसे भावनात्मक अवसर पर भी कोई नेता या अधिकारी श्रद्धांजलि देने नहीं आया। उन्होंने कहा कि शहीद के नाम पर राजनीति तो बहुत हुई, लेकिन अब शहीद के परिवार को भुला दिया गया।
अंतिम संस्कार में उमड़े थे नेता, अब कोई सुध नहीं
परिवार का कहना है कि पुलवामा हमले के बाद जब देशभर में शोक की लहर थी, उस समय शहीद के अंतिम संस्कार में सभी पार्टियों के बड़े नेता पहुंचे थे। हर तरफ संवेदनाएं जताई गईं और वादों की झड़ी लगाई गई। लेकिन समय बीतते ही शहीद की शहादत और परिवार की जरूरतें सबके लिए गौण हो गईं।
ग्रामीणों और CRPF जवानों ने दिया सम्मान
शहादत दिवस पर परिवार ने शहीद की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और कन्या भोज का आयोजन किया। इस दौरान गांव के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सीआरपीएफ के अधिकारी और जवान भी पहुंचे और शहीद को नमन कर श्रद्धांजलि दी।
पुलवामा हमले में शहीद हुए थे 40 जवान
गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इन्हीं में से एक थे जबलपुर जिले के खुदावल गांव निवासी अश्विन काछी। उस समय अश्विन की शादी तय हो चुकी थी और परिवार उसके सिर पर सेहरा बंधने का इंतजार कर रहा था, लेकिन आतंकियों ने उसकी जिंदगी और परिवार की खुशियां छीन लीं।
