
उमरिया। मध्य प्रदेश में इस बार गिद्धों की गणना को लेकर वन विभाग ने हाईटेक तैयारी कर ली है। प्रदेश में पहली बार गिद्धों की शीतकालीन गणना मोबाइल एप्लीकेशन Epicollect5 के माध्यम से की जाएगी। यह गणना 20 से 22 फरवरी के बीच होगी, जिसमें शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के करीब 250 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहेंगे।
वन विभाग का कहना है कि ऐप आधारित इस गणना से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, डेटा संग्रह में तेजी आएगी और समय की भी बचत होगी।
ईको सेंटर ताला में आयोजित हुई कार्यशाला
गिद्ध गणना की तैयारी को लेकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ईको सेंटर ताला में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में वन वृत्त शहडोल के उत्तर शहडोल, दक्षिण शहडोल, उमरिया, अनूपपुर तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप वनमंडलाधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी और मैदानी कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यशाला में वल्चर कमेटी के सदस्य एवं मास्टर ट्रेनर दिलशेर खान ने मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले गिद्धों की विभिन्न प्रजातियों और उनके प्राकृतिक रहवास पर जानकारी दी। वहीं मोहन नागवानी ने Epicollect5 ऐप के संचालन और डेटा अपलोड की तकनीकी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया।
फोटो के साथ मौके पर ही होगा डेटा अपलोड
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि गणना के समय कर्मचारी मौके पर ही गिद्धों की फोटो खींचकर ऐप में आवश्यक विवरण दर्ज करेंगे। इसके बाद डेटा तुरंत ऑनलाइन अपलोड कर दिया जाएगा। इससे गणना में गलती की संभावना कम होगी और रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा।
बांधवगढ़ में 4 प्रजातियों की मौजूदगी, 3 नई प्रजातियों की उम्मीद
फिलहाल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गिद्धों की चार प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं—
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भारतीय गिद्ध (Long Billed Vulture)
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सफेद पूंछ वाला गिद्ध (White Backed Vulture)
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राज गिद्ध (Red Headed Vulture)
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इजिप्शियन वल्चर (Egyptian Vulture)
इसके अलावा विशेषज्ञों को इस बार तीन और प्रजातियों के दिखने की उम्मीद है—
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हिमालयन ग्रिफन
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यूरेशियन ग्रिफन
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सिनेरियस गिद्ध
वन विभाग का मानना है कि यह गणना प्रदेश में गिद्धों की संख्या और उनके संरक्षण की दिशा तय करने में अहम साबित होगी।
गिद्ध पर्यावरण के सफाईकर्मी, संरक्षण बेहद जरूरी
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि गिद्ध पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं और बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद करते हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार गिद्ध गणना में 150 कर्मचारी सीधे फील्ड में कार्य करेंगे, जबकि लगभग 100 अधिकारी और कर्मचारी निगरानी व समन्वय का काम संभालेंगे। इस तरह कुल मिलाकर करीब 250 लोग इस अभियान में शामिल रहेंगे।
डिजिटल तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता
वन विभाग के अनुसार, ऐप आधारित प्रणाली से अब गिद्ध गणना के आंकड़ों में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी। यह कदम प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
