Monday, May 18

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युवराज मेहता मौत मामले में बड़ा एक्शन: नोएडा ट्रैफिक सेल और जनस्वास्थ्य विभाग भंग, अधिकारियों पर गिरी गाज

नोएडा। सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन इमारत में गहरे गड्ढे में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। इस घटना के बाद प्राधिकरण ने एनटीसी (नोएडा ट्रैफिक सेल) और जनस्वास्थ्य विभाग को भंग कर दिया है। यह फैसला लापरवाही के गंभीर आरोपों के मद्देनजर लिया गया है।

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16 जनवरी की देर रात हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे शहर में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले ने तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी स्वयं संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

कर्तव्य पालन में लापरवाही के आरोप, विभागीय जांच शुरू

प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल और वर्क सर्किल-6 के प्रभारी विश्वास त्यागी पर कर्तव्य पालन में गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। उन्हें पद से हटाकर कार्मिक विभाग में अटैच कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

प्राधिकरण के अनुसार, मॉल के बेसमेंट निर्माण के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में डूबने से युवराज मेहता की मौत हुई थी। आरोप है कि मौके पर सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेतों की भारी कमी थी।

एसआईटी जांच पूरी, लेकिन रिपोर्ट अब भी लंबित

युवराज मेहता की मौत की जांच के लिए शासन स्तर पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, लेकिन अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही रिपोर्ट के आधार पर अंतिम कार्रवाई सामने आई है। इससे लोगों में प्रशासन की भूमिका को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

दो अधिकारियों का तबादला, जिम्मेदारियां वर्क सर्किल को सौंपी गईं

नोएडा प्राधिकरण ने सिविल और जनस्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया है। वहीं, भंग किए गए विभागों की जिम्मेदारियां अब वर्क सर्किल अधिकारियों को सौंप दी गई हैं।

वर्क सर्किल प्रभारियों के क्षेत्र बदले, शहरभर में समीक्षा अभियान

युवराज की मौत के बाद नोएडा प्राधिकरण ने प्रशासनिक स्तर पर व्यापक बदलाव करते हुए लगभग सभी वर्क सर्किल प्रभारियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल कर दिया है। प्राधिकरण के नए सीईओ ने शहर में खुले नालों, गड्ढों और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा बैठक भी बुलाई है।

इसके तहत अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है और सुधार कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराया गया है। घटना के बाद स्थल पर बैरिकेडिंग, स्ट्रीट लाइट और अन्य सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं।

वास्तविक जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी

हालांकि प्राधिकरण ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन जनता के बीच अब भी सवाल बना हुआ है कि वास्तविक दोषियों पर कब तक सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद एसआईटी रिपोर्ट लंबित होने से मामले की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

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