Monday, February 16

फर्जी केस और झूठी सूचना देने वालों पर अब होगी FIR, हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद यूपी पुलिस ने शुरू की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में फर्जी मुकदमे दर्ज कराने, झूठे आरोप लगाने और पुलिस को भ्रामक सूचना देने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद यूपी पुलिस ने ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने की अनिवार्य प्रक्रिया लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में डीजीपी राजीव कृष्णा ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले की जांच में आरोप गलत पाए जाते हैं और पुलिस फाइनल रिपोर्ट (एफआर) या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है, तो केवल मामला बंद करना पर्याप्त नहीं होगा। बल्कि पुलिस को झूठी, फर्जी या मनगढ़ंत सूचना देने वाले व्यक्ति के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराना अनिवार्य होगा।

क्लोजर रिपोर्ट से पुलिस की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर जांच में यह साबित हो जाए कि शिकायतकर्ता ने जानबूझकर झूठी या भ्रामक जानकारी दी थी, तो पुलिस को उसके खिलाफ अनिवार्य रूप से लिखित शिकायत दर्ज करनी होगी। यह शिकायत संबंधित मजिस्ट्रेट या कोर्ट में धारा 215(1)(ए) BNSS के तहत दाखिल की जाएगी।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि फाइनल रिपोर्ट लगाने के बाद भी पुलिस की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। उसे अलग से कार्रवाई शुरू करनी होगी ताकि झूठे आरोप लगाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।

60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पुलिस अधिकारी जांच पूरी करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करें। यह आदेश पुलिस विभाग के साथ-साथ मजिस्ट्रेट स्तर के न्यायिक अधिकारियों पर भी लागू होगा।

कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश लिखित रूप में जारी किया जाए, ताकि हर जिले में इसका पालन सुनिश्चित हो सके।

धारा 193 BNSS के तहत भी होगी कार्रवाई

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि फाइनल रिपोर्ट दाखिल की जाती है, तो पुलिस को धारा 193 BNSS के अंतर्गत अंतिम रिपोर्ट के साथ-साथ अलग से लिखित शिकायत भी देनी होगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

उल्लंघन पर अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आदेश का उल्लंघन होता है, तो संबंधित इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO), एसएचओ, सीओ, लोक अभियोजक और फॉरवर्डिंग अथॉरिटी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जांच में यह साबित हो जाए कि कोई अपराध हुआ ही नहीं, तब भी जांच अधिकारी की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। ऐसे मामलों में झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई करना अनिवार्य है।

डीजीपी ने बुलाई बैठक, जल्द जारी होगा निर्देश

हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीजीपी राजीव कृष्णा ने इस विषय पर बैठक बुलाकर सभी जिलों में कार्रवाई की प्रक्रिया तय करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही पूरे प्रदेश में पुलिस को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

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