
नई दिल्ली / बेंगलुरु: क्या एक महिला, जो किसी पुरुष के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में है, अपने साथी पर दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का केस दर्ज कर सकती है? यह संवेदनशील और नए कानूनी सवाल सुप्रीम कोर्ट में उठा है। अदालत ने इस मामले पर सरकार से जवाब मांगा है और संबंधित कानूनी स्पष्टीकरण के लिए एडवोकेट और एमिकस क्यूरी नियुक्त किए हैं।
मामला क्या है?
बेंगलुरु के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. लोकेश बी. एच. की शादी फरवरी 2000 में नवीना से हुई थी। शादी के 10 साल बाद, तीर्था नाम की महिला ने दावा किया कि उसने लोकेश से 2010 में शादी की थी। 2015 में तीर्था ने लोकेश और उनके परिवार के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं, जिन्हें समझौते के बाद बंद किया गया।
इसके बाद 2016 में तीर्था ने एक और एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि लोकेश ने दहेज की मांग करते हुए उसे जिंदा जलाने की कोशिश की। तीर्था ने घरेलू हिंसा के तहत दूसरा मुकदमा भी दर्ज कराया।
कोर्ट-कचहरी का हाल
लोकेश ने फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की, यह दावा करते हुए कि तीर्था के साथ उसका संबंध लिव-इन रिलेशनशिप था, शादी नहीं। फैमिली कोर्ट ने अभी तक फैसला नहीं दिया। इसके बाद लोकेश ने हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और एन. के. सिंह की बेंच ने शुक्रवार को मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस सवाल पर गंभीर ध्यान दिया कि क्या लिव-इन पार्टनर के खिलाफ सेक्शन 498A या संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सरकार की ओर से जवाब मांगा और अधिवक्ता नीना नरीमन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।
पक्षकारों की दलीलें
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पिटीशनर लोकेश की ओर से: सीनियर एडवोकेट संजय नूली ने कहा कि सेक्शन 498A की सख्ती केवल पत्नी पर लागू होती है, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला इस कानून के दायरे में नहीं आती।
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तीर्था की ओर से: अदालत में आरोप है कि उसे दहेज और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा, और उसे न्याय दिलाने का अधिकार है।
कानून क्या कहता है?
आईपीसी की धारा 498A के तहत, केवल पति और उसके रिश्तेदार महिला के खिलाफ उत्पीड़न या क्रूरता करने पर कार्रवाई की जा सकती है। उल्लंघन करने पर तीन साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में लिव-इन रिलेशनशिप पर 498A लागू होती है या नहीं इसका ऐतिहासिक फैसला आने वाला है, जो पूरे देश में परिवार और दहेज कानून की व्याख्या को प्रभावित कर सकता है।
