Saturday, February 14

पत्नी को मोहरा बनाकर 35 हजार की सैलरी वाला ‘साहब’ बना करोड़पति, ACB ने अब याद दिलाया ‘छठी का दूध’

बीकानेर/फलोदी: राजस्थान के फलोदी में एक आम सरकारी कर्मचारी की रॉयल लाइफ ने उसकी पत्नी को भी सलाखों के करीब ला खड़ा कर दिया। कनिष्ठ सहायक (LDC) शुभकरण परिहार (छीपा) की आधिकारिक तनख्वाह महज 35 हजार रुपए थी, लेकिन एसीबी की छापेमारी में खुलासा हुआ कि उनके पास 15 वर्षों में अर्जित धन से कई गुना अधिक काली कमाई थी।

This slideshow requires JavaScript.

75 लाख कैश, 2 किलो सोना और 5 आलीशान मकान

शुक्रवार को एसीबी की पांच टीमों ने शुभकरण के पांच ठिकानों पर छापेमारी की। घर के कोनों से 75 लाख रुपए की नगदी, संदूकों में 2 किलो सोना और पांच आलीशान मकान बरामद हुए। जांच में पता चला कि कनिष्ठ सहायक ने अपनी आधिकारिक आय के मुकाबले 938 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की थी। 15 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति में 17 बीघा उपजाऊ जमीन और महंगे प्लॉट भी शामिल थे।

पत्नी सरिता बनी ‘संपत्ति की ढाल’

शुभकरण ने अपनी काली कमाई को सुरक्षित रखने के लिए पत्नी सरिता को मोहरा बनाया। अधिकांश संपत्तियां सरिता के नाम पर खरीदी गई थीं। अब पति-पत्नी दोनों के खिलाफ एसीबी ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया है। जिस घर में कभी खुशियों का बसेरा था, वहीं अब अदालती चक्कर और बदनामी का साया पड़ गया है।

मामूली सहायक से करोड़पति तक

शुभकरण का सफर श्रीडूंगरगढ़ की पूनरासर पंचायत से शुरू हुआ। 2010 में मामूली रोजगार सहायक के रूप में भर्ती हुए, 2022 में प्रमोशन पाकर कनिष्ठ सहायक बने और वर्तमान में कानासर में तैनात थे। लेकिन घर में फाइलों के बोझ के बीच, करोड़ों की संपत्ति का ‘सुल्तान’ बन बैठे थे।

ACB की रेड ने खोली पोल

एसीबी की छापेमारी ने साबित कर दिया कि सरकारी बाबू की रॉयल लाइफ और काली कमाई का जाल कितना बड़ा था। अब न्यायालय के समक्ष पति-पत्नी दोनों को जवाब देना होगा।

Leave a Reply